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मुजफ्फरपुर जिला मुख्यालय में बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले राजस्व कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन किया। सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। अपनी 17 सूत्री मांगों को लेकर कर्मचारी 11 फरवरी से अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर हैं, जिससे जमीन से जुड़े काम पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं। धरना दे रहे कर्मचारियों ने विभाग के प्रधान सचिव के बयान पर कड़ा विरोध जताया। उनका आरोप है कि 2 जून 2025 को तत्कालीन अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह के साथ हुए लिखित समझौते को अब मानने से इनकार किया जा रहा है, जबकि इसे बाद में उच्चस्तरीय बैठक में भी मंजूरी मिली थी। उग्र आंदोलन की चेतावनी कर्मचारी राकेश कुमार ने बताया कि समझौते के तहत उनकी योग्यता स्नातक और ग्रेड-पे 2800 (लेवल-5) तय किया गया था, लेकिन अब तक इस पर कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ। 20 फरवरी 2026 को उपमुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री के साथ हुई वार्ता भी बेनतीजा रही। सिर्फ मौखिक आश्वासन दिया गया, लेकिन लिखित में कुछ नहीं दिया गया। जब सरकार अपने ही लिखित समझौतों को नहीं मान रही है, तो मौखिक आश्वासनों पर भरोसा करना संभव नहीं है। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आम जनता पर हड़ताल का असर इस हड़ताल का असर आम लोगों पर भी साफ दिख रहा है। दाखिल-खारिज, परिमार्जन और जमीन से जुड़े अन्य कार्य पूरी तरह ठप हैं। जिले सहित पूरे बिहार में करीब 46 लाख आवेदन लंबित पड़े हैं। जाति, आवासीय समेत कई प्रमाण पत्र भी नहीं बन पा रहे हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी हो रही है। काम का दबाव बढ़ाया जा रहा है कर्मचारियों का यह भी कहना है कि सरकार काम का दबाव तो बढ़ा रही है, लेकिन उन्हें लैपटॉप, इंटरनेट, प्रिंटर, डोंगल जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। एक कर्मचारी को कई हल्का का जिम्मा दिया जा रहा है, जिससे काम की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
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