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में दिखाई गई अतीक अहमद के पाकिस्तान कनेक्शन में कितनी सच्चाई पूर्व ने किया खुलासा



Dhurandhar 2 Atiq Ahmed Pakistan Connection: रणवीर सिंह स्टारर फिल्म ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ इन दिनों सिनेमाघरों में कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है। मात्र 5 दिनों में 800 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने वाली इस फिल्म में माफिया अतीक अहमद (फिल्म में आतिफ अहमद) के किरदार और उसके पाकिस्तान कनेक्शन को प्रमुखता से दिखाया गया है। फिल्म को लेकर दर्शकों के मन में सवाल था कि क्या वाकई अतीक का रिश्ता सीमा पार के नेटवर्क से था? 

इस सस्पेंस से पर्दा उठाते हुए प्रयागराज के पूर्व आईजी सूर्य कुमार ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि अतीक केवल एक स्थानीय गुंडा नहीं था, बल्कि उसका जाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ था। 

नकली नोटों का कारोबार पर पूर्व आईजी का खुलासा

पूर्व आईजी सूर्य कुमार के अनुसार, 1980 के दशक से ही अतीक अहमद ने अपराध की दुनिया में अपने कदम जमा लिए थे। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) का एक गिरोह नेपाल के रास्ते भारत में नकली नोटों की सप्लाई करता था। काठमांडू स्थित पाकिस्तानी दूतावास से ये जाली नोट सोनौली और वीरगंज जैसे रास्तों से भारत लाए जाते थे। 

अतीक अहमद, सिवान का शहाबुद्दीन और मऊ का मुख्तार अंसारी… ये तीनों इस ‘काले खेल’ के मुख्य खिलाड़ी थे। ये माफिया जाली मुद्रा का इस्तेमाल अपने गिरोह को बड़ा करने, हथियार खरीदने और विवादित जमीनों को औने-पौने दामों में कब्जाने के लिए करते थे।

‘पुलिस वाले की निकाल ली थी चमड़ी’

अतीक अहमद की सनक इस कदर थी कि वह राजनीति में भी ‘निर्विरोध’ रहना चाहता था। पूर्व आईजी ने बताया कि राजू पाल की हत्या सिर्फ इसलिए की गई क्योंकि उसने अतीक के वर्चस्व को चुनौती दी थी। बाद में इस केस के गवाह उमेश पाल को भी बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। अतीक का खौफ ऐसा था कि प्रयागराज में उसने एक बंगाली परिवार की कोठी पर कब्जा कर लिया और जब एक पुलिस अधिकारी वहां समन लेकर पहुंचा, तो अतीक के गुंडों ने उसकी चमड़ी उधेड़कर उसे मार डाला।

फिल्म ‘धुरंधर 2’ में जिस तरह से अतीक के साम्राज्य के ढहने को दिखाया गया है, वास्तविकता भी उससे बहुत अलग नहीं है। पूर्व IG ने बताया कि जब तक अतीक को कुछ विशेष राजनीतिक दलों और सरकारों का समर्थन मिलता रहा, वह मुंबई और अन्य जगहों पर छिपकर अपनी गतिविधियां चलाता रहा। 

लेकिन जैसे ही प्रशासन सख्त हुआ और उसे मिलने वाला सरकारी संरक्षण खत्म हुआ, उसका पूरा गिरोह ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। उसकी अवैध संपत्तियां जब्त कर ली गईं और आम जनता, जो कभी उसके नाम से कांपती थी, उसके खिलाफ उठ खड़ी हुई। 



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