
Om Birla in Lok Sabha: विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला आज (12 मार्च) चेयर पर वापस आ गए हैं। उन्होंने इस प्रस्ताव पर पहली बार अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास में तीसरी बार लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई है। मैंने हमेशा यह पक्का करने की कोशिश की है कि सदन में हर सदस्य नियमों और प्रक्रियाओं के अंदर मुद्दों पर अपनी राय रखे।
ओम बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने से कभी नहीं रोका गया।
‘ऐसा विशेषाधिकार किसी को नहीं है…’
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसद के नियम सर्वोपरि हैं। कुछ सदस्यों का मानना था कि नेता प्रतिपक्ष सदन से ऊपर हैं और किसी भी विषय पर बोल सकते हैं। ऐसा विशेषाधिकार किसी को नहीं है, चाहे वो प्रधानमंत्री हों, मंत्री हों, विपक्ष के नेता या कोई अन्य सदस्य। सभी को नियम के अनुसार ही बोलने का अधिकार है। सदन ने ही ये नियम बनाए हैं और मुझे विरासत में मिले हैं और इन्हें पालन करना अनिवार्य है।
उन्होंने आसन द्वारा विपक्षी सदस्यों के बोलते समय माइक बंद करने के आरोपों पर कहा कि अध्यक्ष के पास माइक ऑन या बंद करने का अधिकार नहीं है। विपक्ष के जो नेता पीठासीन सभापति होते हैं, वे इस बारे में जानते हैं।
मेरे कार्यकाल में सभी महिला सदस्यों ने अपने विचार रखे- बिरला
ओम बिरला ने आगे कहा कि महिला सदस्यों को लेकर भी यह आरोप लगाए गए कि उनको बोलने का मौका कम दिया जाता है। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात का गर्व है कि मेरे कार्यकाल में सभी महिला सदस्यों ने अपने विचार रखे हैं। बजट पर चर्चा के दौरान कुछ महिला सदस्यों ने ट्रेजरी बेंच की ओर जाकर नारेबाजी करने की कोशिश की थी, जो अप्रत्याशित घटना थी, इसलिए मैंने सदन में सत्ता पक्ष के नेता को न आने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि मेरी कोशिश यही रहती है कि भले ही देर रात तक बैठना पड़े, मैं सबके बोलने के बाद ही सदन से जाता हूं। जो भी सदन में बोलना चाहता था, उसे एक साल के अंदर ही मैंने बोलने का मौका दिया।