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हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट ने दी मौत की इजाजत जानिए क्या है पैसिव इच्छामृत्यु जिसकी देश में पहली बार मिली अनुमति…



What Is Passive Euthanasia: इच्छामृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। भारत में पहली बार पैसिल इच्छामृत्यु की इजाजत दी गई। जिसके बाद हर कोई जानना चाहता है कि इच्छामृत्यु (Right To Die) को लेकर भारत और दुनियाभर में क्या नियम और कानून है। इस तरह का फैसला सुनाना खुद सुप्रीमकोर्ट के लिए भी आसान नहीं था। बताया जा रहा है कि जब हरीश राणा को पैसिव इच्छामृत्यु की इजाजत दी गई तो, जज भी भावुक हो उठे।

दरअसल, गाजियाबाद के एक दंपति ने अपने बेटे हरीश राणा के लिए पैसिव इच्छामृत्यु की मांग की थी, जो 13 साल से कोमा में है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं, इसलिए अनुमति दी गई। यह फैसला जस्टिस जे.बी. परदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने सुनाया। इससे इच्छामृत्यु पर बहस तेज हो गई है।

इच्छामृत्यु (Euthanasia) वह तरीका है जिसमें लाइलाज बीमारी या असहनीय दर्द से जूझ रहे मरीज का जीवन खत्म किया जाता है। यह परिवार या मरीज की सहमति से होता है। ये 2 तरह की होती है।

एक्टिव इच्छामृत्यु: इसमें दवा या इंजेक्शन से तुरंत मौत दी जाती है। कई देशों में यह गैरकानूनी है।
पैसिव इच्छामृत्यु: इलाज बंद कर वेंटिलेटर जैसी मशीनें हटाई जाती हैं, जिससे मौत हो जाती है।

भारत में इच्छामृत्यु पूरी तरह कानूनी नहीं, लेकिन 2018 के सुप्रीम कोर्ट फैसले से पैसिव इच्छामृत्यु को सख्त शर्तों पर मंजूरी मिली। मेडिकल बोर्ड जांच करता है कि ठीक होने की संभावना है या नहीं। परिवार की लिखित सहमति जरूरी होती है। अरुणा शानबाग मामले से शुरू हुई बहस ने इसे कानूनी रूप दिया था। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, जीने का अधिकार मरने के अधिकार से जुड़ा है, लेकिन दुरुपयोग रोकने के लिए गाइडलाइंस हैं।

दुनिया में इच्छामृत्यु के नियम क्या?

कई देशों में इच्छामृत्यु कानूनी है, लेकिन सख्त नियमों के साथ, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, लक्जमबर्ग और कोलंबिया में एक्टिव और पैसिव दोनों की अनुमति है, लेकिन डॉक्टरों की मंजूरी जरूरी होती है।
स्विट्जरलैंड: असिस्टेड सुसाइड वैध, जहां व्यक्ति खुद दवा लेता है, लेकिन कोई निजी लाभ नहीं होना चाहिए।
अमेरिका: कैलिफोर्निया, वॉशिंगटन जैसे राज्यों में अनुमति; कनाडा में 2016 में कानून बना।
वहीं ब्रिटेन, फ्रांस और इटली में सीमित या गैरकानूनी माना जाता है। रूस और चीन में भी प्रतिबंधित है।

ज्यादातर देशों में 18 साल से कम उम्र वालों को अनुमति नहीं दी जाती। नीदरलैंड्स और बेल्जियम में स्पेशल मामलों में अनुमति देदी जाती है। यह फैसला मानवीय दृष्टिकोण दिखाता है, लेकिन कई बड़े सवाल भी खड़े करता है। हरीश राणा को पैसिव इच्छामृत्यु की इजाजत देने के बाद देशभर में इसको लेकर बहस तेज हो गई है। 



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