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मोतिहारी के केसरिया थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम एक दिल दहला देने वाली घटना हुई। राखवा पंचायत से होकर गुजरने वाली राघवा नदी में नहाने के दौरान छह बच्चों की डूबकर मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही गांव में कोहराम मच गया। देखते ही देखते नदी किनारे सैकड़ों लोगों की भीड़ जुट गई और हर ओर चीख-पुकार गूंजने लगी। घास काटने और बकरी चराने गए थे, रास्ते में नदी में स्नान करने लगे स्थानीय लोगों ने बताया कि सभी बच्चे दोपहर में घर से निकले थे। उनका रोज़ का रूटीन था घास काटना, बकरियां चराना, और फिर नदी के किनारे खेलना। उसी तरह मंगलवार को भी ये बच्चे नदी किनारे पहुंचे और नहाने लगे। तभी अचानक एक बच्चा गहरे पानी में उतर गया और तेज़ बहाव में फंसकर डूबने लगा। उसे बचाने के लिए बाकी बच्चे भी पानी में कूद गए। लेकिन नदी के गहरे गड्ढे और तेज़ धारा के कारण वे खुद ही उसमें समा गए। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि बच्चे खेलते-खेलते अचानक तेज़ गहराई में चले गए और कुछ ही सेकंड में पानी में गायब हो गए। कोई कुछ समझ पाता, उससे पहले ही हादसा हो चुका था। गांव वालों ने शोर मचाया, लेकिन मदद पहुंचने तक देर हो चुकी थी नदी किनारे मौजूद लोगों ने बच्चों को डूबते देखा तो तुरंत शोर मचाया। आसपास खेतों में काम कर रहे लोग भी मौके पर दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। नदी की तेज़ धारा ने एक-एक कर सभी बच्चों को बहा दिया था। मौके पर मौजूद एक बुजुर्ग ने बताया हम लोग जितना तेज़ दौड़ सकते थे, दौड़े… पर नदी हमसे तेज़ थी। पलभर में सब खत्म हो गया। प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची, घंटेभर की मशक्कत के बाद निकाले गए शव घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, एनडीआरएफ की टीम और प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। गोताखोरों की मदद से रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। लगभग एक घंटे की लगातार कोशिशों के बाद सभी छह बच्चों के शवों को नदी से बाहर निकाला गया। जैसे ही शव किनारे लाए गए, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव की महिलाएं दहाड़ें मारकर रोने लगीं। कई लोग बच्चों के शव देखकर बेहोश हो गए। पूरा गांव शोक में डूब गया। एक ही परिवार की तीन बच्चियां भी शामिल—पिता और गांव की आंखें सूनी सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि मृतकों में एक ही परिवार की तीन सगी बहनें शामिल हैं। 12 वर्षीय दीक्षा कुमारी 6 वर्षीय प्रिया कुमारी 9 वर्षीय सोनाक्षी कुमारी तीनों धर्मेंद्र सहनी की बेटियां थीं। इसके अलावा— 12 वर्षीय सोनाली कुमारी (पिता कामेश्वर साहनी) 11 वर्षीय प्रिंस कुमार (पिता मनोज साहनी) 8 वर्षीय छोटी कुमारी (पिता मनोज कुमार साहनी) भी इस हादसे में अपनी जान गंवा बैठे। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी छोटी उम्र में छह-छह बच्चों की मौत ने गांव को सदमे में ला दिया है। जिस घर से तीन बेटियों का अर्थी एक साथ उठेगी, उस परिवार का दुख शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। थानाध्यक्ष ने कहा—सभी शव बरामद, आगे की कार्रवाई जारी केसरिया थानाध्यक्ष ने बताया, सभी शवों को नदी से निकाल लिया गया है। पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।” उन्होंने साथ ही लोगों से अपील की कि बच्चे नदी या तालाब के पास अकेले न जाएं।
गर्मी बढ़ने के साथ इस तरह की घटनाएं हर साल सामने आती हैं। समय रहते सावधानी बरती जाए तो कई जीवन बचाए जा सकते हैं। गांव में माहौल भारी, स्कूलों में शोक, प्रशासन अलर्ट मोड पर हादसे के बाद राखवा पंचायत में शोक की लहर है। गांव के स्कूलों में छुट्टी कर दी गई है। पंचायत प्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर सांत्वना दे रहे हैं। प्रशासन ने नदी के किनारे अस्थायी चौकसी बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों को कहा गया है कि बच्चों को नदी या गहरे पानी के पास अकेले न जाने दें। समापन: एक लापरवाही, छह मासूम जानें… गांव सदमे में एक ही शाम में छह परिवारों की खुशियां उजड़ गईं। जिन बच्चों की खिलखिलाहट से गांव गूंजता था, अब वहां मातम पसरा है। राघवा नदी के इस हादसे ने एक बार फिर याद दिला दिया कि बच्चों को प्राकृतिक जल स्रोतों के पास बिना निगरानी भेजना कितना खतरनाक हो सकता है। गांव के लोग कहते हैं, अगर किसी एक ने उन बच्चों को रोक दिया होता, तो शायद आज ये हादसा नहीं होता।
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