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की बुक साइबर फ्रॉड करेगी लोगों को सतर्क प्रदेश की घटनाओं की कहानियां कॉल सेंटर से बड़े पैमाने पर पनपता अपराध जानें कैसे…




पटना में IPS सुशील कुमार की बुक साइबर कथाएं- डिजिटल सुरक्षा की राह पर को लेकर गांधी संग्रहालय में परिचर्चा का आयोजन हुआ। परिचर्चा में बड़ी संख्या में पटना के साहित्यकार, रंगकर्मी, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता सहित समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लोग शामिल हुए। इस दौरान बुक से जुड़ी कई बातें रखी गईं। देश और प्रदेश में हो रहे साइबर क्राइम को लेकर सभी ने चिंता जताई और सुझाव भी व्यक्त किए। वहीं, किताब को लेकर कवि प्रो. रमेश ऋतंभर ने कहा कि पूंजीवाद के संकट के दौर में यह किताब हमारे अंदर के भय, छल और कपट को सामने लाती है। यह क्राइम से बचने की कोई किताब नहीं है। यह लेखन है, रचनात्मक लेखन है। आगे कहा, हमें कैसे और क्यों ठग लिया जाता है? हम लालच के कारण ठगे जा रहे हैं। यह हमारे समय समाज के अंदर के ठग लिए जाने की प्रवृत्ति को समाने लाती है। ज्यादातर जल्दी अमीर बनने और अन्य कारणों से ठगी के शिकार हो रहे हैं। बुक के लेखक बोले- कहानियों के जरिए दिए हैं कई संदेश पुस्तक लेखक सुशील कुमार ने बताया, साइबर से संबंधित अपराध जब 2015 से 2018 के बीच बढ़ रहा था, तब थाने से भगा दिया जाता था। पुस्तक को सरल भाषा में कैसे लाई जाए यह चुनौती थी। आगे कहा, मैंने छोटी-छोटी कहानियों के माध्यम से अपनी बात कहने की कोशिश की। किताब को रोचक बनाने के लिए शीर्षक रखे गए हैं। सभी अच्छी कहानियां हैं पर जिनकी कहानियां हैं, उनकी निजता का सम्मान करने लिए नाम बदल दिया गया है। डिजिटल अरेस्ट के दौर में साइबर सुरक्षा जरूरी है नीरज गुरु ने कहा कि किताब का टाइटल डिजिटल सुरक्षा की राह बहुत महत्वपूर्ण है। आजकल डिजिटल अरेस्ट कर लिया जाता है। ऐसे में साइबर सुरक्षा की जरूरत है। किताब में भोजपुर जिले की एक शिक्षिका की कहानी के माध्यम से अपनी बात कही गई है। इसमें पचास कहानियां शामिल हैं। साइबर क्राइम के मोड्स ऑपरेंडी से हमें परिचित कराती है किताब। बिहार प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष व चर्चित कथाकार संतोष दीक्षित ने कहा, मेरे लिए आज दोहरी खुशी है। सुशील को मैं कवि मानता था, लेकिन अब वे कथा की ओर आ रहे हैं। साइबर क्राइम संगठित रूप से कॉल सेंटर चलाकर किया जाता है। हिंदी में यह अपने ढंग की पहली किताब है। कथा जगत का यह आधुनिक विस्तार है। अपने यहां पंचतंत्र और जातक कथाओं की बातें हमारी स्मृतियों में मौजूद हैं। यह किताब उसका आधुनिक रूप है। यह अपराध की कार्यशैली को कथाओं के माध्यम से सामने लाकर जागरूक तो बनाता ही है हमें सुरक्षित भी करता है। साइबर की दुनिया रोमांचकारी और खतरों से भी भरी हुई है। शिल्प की दृष्टि से रिपोर्ताज और कथा दोनों है। बुक में टेक्निकल टर्म को आसान से समझ सकते हैं एमिटी यूनिवर्सिटी में लॉ फैकल्टी के डीन राजीव रंजन ने कहा कि साइबर अपराध जितने बड़े पैमाने पर हो रहे हैं, इससे संबंधित जितने तकनीकी टर्म्स रहे हैं। वे बहुत अदबी अंदाज में और डिटेल में लिखे गए हैं। ये कहीं से भी पुलिस डायरी नहीं लगते हैं। उन्होंने तकनीकी बातों को आसान भाषा में समझाने की कोशिश की है।
आगे कहा कि यह किताब एक ऐसे विषय पर समझदारी विकसित करती है, जिसके बारे में जानकारी होने के बावजूद हम ठगे जा रहे हैं। इसलिए किताब उस समझदारी को सच्ची कहानियों के जरिए परिपक्व बनाने के लिए है। लोभ-लाभ के बीच फंसे व्यक्ति को अपने हक में ताकतवर और सही फैसला लेने का अनुशासन किताब डेवलप कर सकती है। साइबर स्टॉकिंग चिंता का विषय बन रहा कवयित्री गुंजन उपाध्याय पाठक ने कहा कि साइबर स्टॉकिंग अब कोई नई चीज नहीं है। फोटो फिनिश बताती है कि सोशल मीडिया पर साझा के गई छोटी जानकारी को अपराधी इस्तेमाल कर सकते हैं। पुस्तक पढ़कर सजगता का नया आत्मविश्वास जगा है। शायर संजय कुमार कुंदन ने कहा कि सुशील कुमार मुख्यतः कवि रहे हैं। मैं इस पुस्तक का प्रारंभ से ही पाठक रहा हूं। एक बूढ़े लोग साइबर क्राइम के आसान शिकार हो जाते हैं। यह किताब हर घर में रहनी चाहिए। वकील बोले- किताब की हर कहानी से लोग होंगे सतर्क पेशे से वकील प्रियदर्शी मातृशरण ने कहा कि इस किताब की हर कहानी एक नए पहलू को सामने वाली और सतर्क करने वाली किताब है। हम बेफिजूल की चीजों में लगे रहते हैं। हमारा लगातार स्क्रीन पर बने रहना एक्सपोज करता है। हमारे पड़ोसी मुल्कों में साइबर स्लेवरी की बात चलती है। हमें ट्रैक किया जाता है कि हम क्या देख रहे हैं? क्या पसंद है,नहीं है। फिर जाल बिछाया जाता है। दानिश ने अपनी टिप्पणी में बताया कि यह पुस्तक कथा रिपोर्ताज की शैली में लिखी गई है। इस विषय पर कथेतर गद्य की यह पहली किताब है। ग्लोब में बैठा दुनिया का कोई आदमी कहीं से भी बैठकर आपको डिजिटल अरेस्ट कर सकता है। परिचर्चा को भावना शेखर और युवा कवि प्रत्यूषचंद्र मिश्रा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात कवि आलोक धन्वा ने की। संचालन गजेन्द्रकांत शर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन चंद्रबिंद सिंह ने किया। परिचर्चा में शामिल प्रमुख लोगों में शामिल रहे व्यासजी मिश्रा, मीरा मिश्रा, कुमार मुकुल, सोमू आनंद समेत अन्य रहे।



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