
WhatsApp News: नए सिम बाइंडिंग नियम से मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल बदलने वाला है। दूरसंचार विभाग (डीओटी) के नवंबर 2025 में जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, 1 मार्च 2026 से व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे ओटीटी ऐप्स को एक्टिव सिम कार्ड से लिंक करना अनिवार्य होगा, मतलब यूजर्स को ये सभी अकाउंट सिम कार्ड से लिंक करने होंगे और जिस फोन में सिम होगी सिर्फ उसी फोन में इस ऐप्स का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इस नियम का मकसद साइबर फ्रॉड, फर्जी अकाउंट और ऑनलाइन ठगी को रोकना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने कंपनियों की मांग पर डेडलाइन बढ़ाने से इनकार कर दिया है। यह नियम टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स के तहत लागू हो रहा है।
व्हाट्सऐप यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?
अगर फोन में रजिस्टर्ड सिम नहीं है या वह इनएक्टिव है, तो ऐप काम करना बंद कर सकता है। भारत में व्हाट्सऐप के करोड़ों यूजर्स हैं, जो एक नंबर से कई डिवाइस पर ऐप चलाते हैं। नए नियम से लिंक्ड डिवाइस पर लिमिट लग जाएगी, अभी वाले फीचर पर पाबंदी लगेगी। अगर सिम फोन में नहीं है, तो ऐप सीमित हो जाएगा या बंद हो सकता है।
6 घंटे में लॉगआउट को जाएगा व्हाट्सऐप वेब
व्हाट्सऐप वेब हर 6 घंटे में ऑटो लॉगआउट हो जाएगा और फिर से जारी रखने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करना पड़ेगा। एक सिम से कई डिवाइस पर ऐप चलाने वाले यूजर्स सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। वहीं, बार-बार सिम बदलने वाले लोग भी परेशान हो सकते हैं।
सिम बाइंडिंग से फ्रॉड पर कितनी रोक लगेगी?
पिछले कुछ सालों में ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल सेंटर और फेक प्रोफाइल से जुड़े अपराध बढ़े हैं। सरकार का कहना है कि एक्टिव सिम से जुड़े अकाउंट से जांच एजेंसियां अपराधियों तक आसानी से पहुंच सकेंगी। ऐसे में यह नियम क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल स्कैम को रोकने के लिए जरूरी है।
कई अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियां और इंडस्ट्री ग्रुप्स ने इस नियम पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि यह कानूनी दायरे से बाहर है और यूजर्स की प्राइवेसी पर असर डालेगा। हालांकि, सरकार सख्त रुख पर कायम है और कोई ढील नहीं दे रही। यूजर्स को सलाह है कि अपना रजिस्टर्ड सिम एक्टिव रखें और चैट्स का बैकअप रखें। यह बदलाव डिजिटल इंडिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक कदम होगा।