
Mohan Bhagwat Uttarakhand Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने अपने उत्तराखंड दौरे के दूसरे दिन पूर्व सैनिकों और पूर्व सेना अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान एक खास कार्यक्रम रखा गया, देहरादून के निम्बूवाला में हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में ये आयोजन हुआ। इस ‘प्रमुख जन गोष्ठी एवं विविध क्षेत्र समन्वित संवाद कार्यक्रम’ में मोहन भागवत ने राष्ट्र निर्माण में समाज की भूमिका पर जोर दिया।
कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि राष्ट्र का भाग्य समाज पर निर्भर करता है। उन्होंने जोर देकर कहा, “समाज मजबूत होगा तो राष्ट्र की रक्षा भी मजबूत होगी।” समाज का संगठित होना हर नागरिक को ताकत देता है। इसके बाद सवाल-जवाब के दौरान पूर्व सैनिकों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता, युवा पीढ़ी और नीतियों पर सवाल पूछे। जिसपर मोहन भागवत ने हर सवाल का तार्किक जवाब दिया।
मोहन भागवत ने सवालों के दिए जवाब
अग्निवीर योजना: मोहन भागवत ने अग्निवीर योजना को एक प्रयोग बताया। उन्होंने कहा कि, अनुभव के आधार पर इसमें बदलाव की गुंजाइश है। उत्कृष्ट नेतृत्व और सैन्य तैयारी हमेशा जरूरी है।
पड़ोसी देशों से रिश्तों पर भागवत ने कहा- नेपाल, बांग्लादेश और कश्मीर ऐतिहासिक रूप से एक ही सांस्कृतिक क्षेत्र के हिस्से हैं। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। विरोधी गतिविधियों के खिलाफ सतर्क नीति जरूरी।
हिंदू पहचान और समरसता: मोहन भागवत ने कहा- भारतीय दृष्टि “वसुधैव कुटुंबकम” पर आधारित है। हिंदू विचार उदार है। कोई भी बिना बदलाव के हिंदू समाज में शामिल हो सकता है। मंदिर, जल स्रोत और श्मशान सबके लिए खुले होने चाहिए।
सोशल मीडिया पर कटुता: RSS प्रमुख ने कहा- शास्त्रार्थ और संवाद की परंपरा को बढ़ावा दें। जमीनी स्तर पर फीडबैक से नीतियां बेहतर बनती हैं।
भ्रष्टाचार: मोहन भागवत ने भ्रष्टाचार को लेकर कहा कि, यह व्यवस्था नहीं, बल्कि नियत की समस्या है। बच्चों में संस्कार, कमाई में बचत और समाज के लिए दान की भावना जरूरी।
युवा, पलायन और विकास: RSS प्रमुख ने कहा कि, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय उद्यम में संभावनाएं हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकने के लिए योजनाबद्ध प्रयास चाहिए।
समान नागरिक संहिता (UCC): मोहन भागवत ने कहा कि, UCC यह राष्ट्रीय एकता के लिए महत्वपूर्ण है। इससे विवाद कम होंगे।
आरक्षण और जनसंख्या: RSS प्रमुख ने मोहन भागवत ने कहा कि धैर्य और सहमति जरूरी है। जनसंख्या असंतुलन पर समग्र नीति जरूरी है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने पूर्व सैनिकों से कहा कि सीमाओं पर लड़ाई के अलावा समाज में भी सेवा जरूरी है। उन्होंने संघ के 1 लाख 30 हजार सेवा प्रकल्पों से जुड़ने का आग्रह किया और कहा कि, शताब्दी वर्ष में उनकी भागीदारी मूल्यवान होगी। इसके बाद कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत से हुआ। यह कार्यक्रम राष्ट्र निर्माण और सामाजिक एकता पर RSS की सोच को दर्शाता है।