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नालंदा के परवलपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित डाक बंगला रोड के थाना परिसर में श्री श्री बाबा कल्यानेश्वर नाथ सेवा संघ की देखरेख में ‘श्री रुद्र महायज्ञ और श्रीमद् भागवत कथा’ आयोजित हुई है। इससे पूरा इलाका भक्तिमय हो गया है। 10 फरवरी से चल रहे इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान का आज आखिरी दिन है। कथा के अंतिम चरण में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। देर रात तक चलने वाले इस कथा वाचन को सुनने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग डटे रहते हैं। भव्य आयोजन हनुमान महाराज, समस्त शिव भक्तों और समाजसेवी विजय प्रकाश के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा रहा है। भगवान के चरणों में निरंतर प्रीति लगाए रखें मनुष्य कथा व्यास के रूप में वृंदावन से पधारे पूज्य गौतम जी महाराज अपने सुमधुर प्रवचनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। उपस्थित जनसमुदाय और मीडियाकर्मियों का अभिवादन करते हुए उन्होंने कहा कि परवलपुर की इस पावन धरती पर आना उनके लिए परमात्मा और माधव की असीम कृपा है। उन्होंने आयोजनकर्ता मनीष बाबू के श्रद्धा भाव की सराहना की। पूरे बिहारवासियों को संदेश देते हुए गौतम महाराज ने कहा कि मनुष्य जिस भी स्थिति, अवस्था या व्यवस्था में रहे, उसे निरंतर भगवान की प्राप्ति और उनके चरणों में प्रीति लगाने का प्रयास करना चाहिए। इस महायज्ञ का भी मुख्य उद्देश्य यही है। उन्होंने कहा कि बाबा कल्यानेश्वर नाथ महादेव के इस पवित्र प्रांगण में आने मात्र से ही भक्तों को उनके मनवांछित फल की प्राप्ति हो जाती है। नालंदा के ऐतिहासिक गौरव को किया नमन कथा के दौरान नालंदा की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता का जिक्र करते हुए गौतम महाराज ने कहा कि राजगीर और नालंदा कोई साधारण क्षेत्र नहीं हैं। यह जरासंध की धरती होने के साथ-साथ दुनिया में ज्ञान और मोक्ष की पावन भूमि मानी जाती है। वे इस भूमि को नमन और वंदन करते हैं। अपने पुराने संस्मरण को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि साल 2000 के पहले राजगीर के ऐतिहासिक मलमास मेला में उन्हें सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उपस्थित होने का सौभाग्य मिला था। उन्होंने कहा कि ऐसी ज्ञान की भूमि पर ज्ञान बांटने और कथा सुनाने का अवसर मिलना ईश्वर की विशेष कृपा का ही परिणाम है। रुद्राभिषेक और वेदी पूजन के बाद कथा का रसपान कथा स्थल पर मौजूद महिला श्रद्धालु जुली कुमारी ने बताया कि गौतम महाराज बहुत ही सुंदर और सरल तरीके से कथा कहते हैं। श्रोता उनकी वाणी से इतने प्रभावित हैं कि वे लोग शुरू से लेकर अंत तक कथा पंडाल में मौजूद रहते हैं। उन्होंने बताया कि इस अनुष्ठान में पूजा का बहुत बड़ा महत्व है। भक्तों ने पहले भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया, वेदी पूजन किया और उसके बाद शांति से बैठकर भागवत कथा का रसपान किया।
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