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सेबी के डिस्क्लोजर नियमों में संभावित बलाइंड स्पॉट दिल्ली हाईकोर्ट ने जताई चिंता



दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है, जिससे कॉरपोरेट गवर्नेंस और सेबी के डिस्क्लोजर नियमों पर नए सिरे से बहस छिड़ गई है। यह टिप्पणी सीएफओ नीतिका सूर्यवंशी से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की गई। अदालत ने सेबी के नियमों में ब्लाइंड स्पॉट पर गंभीर चिंता जताई है, खासकर वरिष्ठ अधिकारियों के पिछले कानूनी या पेशेवर इतिहास के खुलासे को लेकर।

नीतिका सूर्यवंशी 2019 से 2025 के बीच अलग-अलग समय में सीएफओ रहीं। याचिका में दावा किया गया कि उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत कई आपराधिक मामले और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (आईसीएआई) में पेशेवर शिकायतें लंबित हैं। इनका कथित तौर पर कंपनी द्वारा निवेशकों को नियुक्ति के समय या बाद में खुलासा नहीं किया गया।

इसके अलावा, कंपनी के शेयरों में असामान्य उतार-चढ़ाव देखे जाने का दावा भी किया गया। 2019 से 2025 के दौरान कंपनी का शेयर 20 से बढ़कर 375 तक पहुंचा। शेयर में असामान्य उतार-चढ़ाव देखा गया और पुनर्नियुक्ति के बाद 80-88 रुपए तक गिर गया। हालांकि, अदालत ने बाजार हेरफेर का सीधा आरोप नहीं लगाया, लेकिन इस ट्रेडिंग पैटर्न को चिंताजनक बताया। नीतिका सूर्यवंशी को संबंधित आपराधिक मामलों में जमानत मिल चुकी है, लेकिन मामला अभी लंबित है।

अदालत ने सेबी से सवाल किया कि क्या मौजूदा नियम वरिष्ठ अधिकारियों को उनके पूर्व कानूनी या पेशेवर इतिहास को निवेशकों से छिपाने की अनुमति देते हैं। सेबी नियम मुख्य रूप से वर्तमान कार्यकाल के दौरान घटित मामलों के खुलासे पर जोर देते हैं, लेकिन पुराने मामलों को छूट मिल सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि “निवेशक संरक्षण को तकनीकी खामियों की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता।” यह निवेशक सुरक्षा की मूल भावना के खिलाफ है। सेबी को निर्देश दिए गए कि वह ट्रेडिंग पैटर्न, सीएफओ की भूमिका और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए कड़े डिस्क्लोजर मानकों की समीक्षा करे।



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