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’29 जनवरी की शाम मैं अपनी चार सहेलियों के साथ गांव से लगभग 1KM दूर तालाब के पास गई थी। वहां दोस्तों के साथ स्वाद चखने के लिए पक्षी मारने वाली जहरीली दवा खा ली। इसके बाद हम लोगों की तबीयत खराब होने लगी। 4 सहेलियों की मौके पर ही मौत हो गई। मैंने थोड़ी सी दवा खाकर थूक दिया, इसलिए मैं बच गई। सहेलियों की मौत के बाद मैं काफी डर गई थी, इसलिए भागकर घर आ गई।’ ये बातें एक नाबालिग लड़की ने दैनिक भास्कर से बातचीत कही। लड़की ने उस दिन की पूरी कहानी बताई। दरअसल, औरंगाबाद के 29 जनवरी को 5 लड़कियों ने एक साथ जहर खाया था। इसमें 4 नाबालिग लड़कियों की मौत हो गई थी। जबकि, एक लड़की इलाज के बाद बच गई। चारों लड़कियों की डेड बॉडी का एक साथ ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार किया, जिसकी फोटो भी सामने आया था। ये सामूहिक आत्महत्या की घटना हसपुरा थाना क्षेत्र के सैदपुर मोती बिगहा गांव की है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… दादा-दादी ने लड़की को रिश्तेदार के घर भेजा चार लड़कियों की मौत के बाद रिपोर्टर नाबालिग लड़की के घर पहुंचे। उस वक्त घर पर उसके दादा-दादी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि इस मामले की ज्यादा जानकारी नहीं है। सुरक्षा कारणों से नाबालिग लड़की को एक रिश्तेदार के घर भेज दिया है। नाबालिग लड़की के घर से आगे बढ़े तो कुछ ग्रामीणों से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन अधिकांश ग्रामीणों ने कुछ भी बताने से साफ इनकार कर दिया। ग्रामीणों से बातचीत करने के बाद गांव से करीब पांच किलोमीटर दूर बिशनपुर गांव पहुंचे, जहां जीवित बची नाबालिग लड़की अपने रिश्तेदार के घर मिली। बातचीत के दौरान उसने घटना वाले दिन की पूरी कहानी बताई। जहरीली दवा खाने के बाद पीया पानी लड़की के अनुसार, चारों सहेलियों ने एक साथ जहरीली दवा खा ली और उसके बाद पानी पी लिया। इस दौरान हम भी दवा लिए, लेकिन बहुत कम मात्रा लेकर तुरंत थूक दिया। इसकी वजह से हमारी जान बच गई। कुछ ही देर में वो चारों सहेलियां मेरे आंखों के सामने बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं। हम डर के कारण वहां से भागकर सीधे घर पहुंची और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। लड़की ने बताया, “घर पहुंचते ही परिजनों ने मुझे नीम के पत्तों का घोल पिलाया, जिससे मुझे उल्टियां हुईं और मेरी तबीयत में सुधार हुआ।” एक ही चिता पर किया गया था चारों का अंतिम संस्कार घटना के बाद आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव के चलते परिजनों ने चारों मृत लड़कियों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर कर दिया। वहीं, जीवित बची लड़की ने बताया कि किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए उसके माता-पिता ने उसे सुरक्षा के लिहाज से एक रिश्तेदार के घर भेज दिया। एक लड़की के जिंदा रहने पर मृतका की मां ने उठाया सवाल इस मामले में एक मृतका की मां ने बताया, “जीवित बची लड़की फिलहाल अपने घर में नहीं है और रिश्तेदार के यहां रह रही है।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब सभी लड़कियों ने एक ही तरह का जहर खाया, तो वह लड़की कैसे बच गई, यह बात उनकी समझ से परे है। मृतका की मां ने यह भी दावा किया कि पुलिस पूछताछ के दौरान जीवित बची लड़की ने चार लड़कों से प्रेम प्रसंग की बात स्वीकार की है। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पिता बोले- अब तक कारण नहीं समझ पाया दूसरी मृत लड़की के पिता ने बताया कि वह महाराष्ट्र में मजदूरी करते है। घटना की सूचना मिलने के बाद वह गांव पहुंचे, लेकिन अब तक उसे इस घटना के पीछे का स्पष्ट कारण समझ में नहीं आया है। प्रेम प्रसंग के सवाल पर उन्होंने कहा, “सभी लड़कियां 12 से 15 साल की उम्र की थीं। इतनी छोटी बच्चियां किसी से प्रेम कैसे कर सकती हैं।” पांचों सहेलियों ने एक साथ जान देने का फैसला किया दाउदनगर एसडीपीओ अशोक कुमार दास ने बताया कि जीवित बची नाबालिग से बातचीत और जांच के आधार पर यह सामने आया है कि सरस्वती पूजा की शाम सभी पांचों सहेलियों को कुछ लड़कों के साथ घूमते देखने की जानकारी उनके अभिभावकों को मिली थी। अभिभावकों ने बच्चियों को कड़ी डांट-फटकार लगाई थी। इसी बात से नाराज होकर पांचों सहेलियों ने एक साथ जान देने का फैसला किया और गांव के पइन के पास जाकर जहरीला पदार्थ खा लिया। पुलिस के सामने प्रेम-प्रसंग को किया था स्वीकार पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद जीवित बची लड़की को उसके रिश्तेदार के घर से बरामद किया और उससे पूछताछ की। एसडीपीओ के अनुसार पुलिस पूछताछ में लड़की ने यह भी स्वीकार किया कि गांव के ही चार लड़कों से उनका मेलजोल था और इसी प्रेम प्रसंग को लेकर वे मानसिक दबाव में थीं। एसडीपीओ ने बताया कि इस घटना में चार लड़कियों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक लड़की किसी तरह बच गई। घटना के दो दिन बाद पुलिस को जब इसकी जानकारी मिली, तब तक काफी कुछ हो चुका था। पूछताछ के बाद पूरे मामले की कड़ी जुड़ी मगध जोन के आईजी भी मौके पर पहुंचे थे, लेकिन शुरुआती दौर में घटना के कारणों का पता नहीं चल सका था। बाद में इलाजरत बच्ची का पता चलते ही वरीय अधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस टीम ने उससे पूछताछ की, जिसके बाद पूरे मामले की कड़ी जुड़ पाई। जीवित बची नाबालिग का बयान दर्ज कर लिया गया है और अब कोर्ट में उसका बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
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