![]()
जमुई में बुधवार को संयुक्त वामपंथी ट्रेड यूनियन और संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी हड़ताल के समर्थन में प्रदर्शन किया गया। श्रमिक विरोधी चार श्रम कोड के खिलाफ सैकड़ों की संख्या में मजदूरों ने शहर में मार्च निकाला और कचहरी चौक को घंटों जाम रखा। इस दौरान केंद्र सरकार का पुतला भी दहन किया गया। प्रदर्शन में बीड़ी मजदूर, विद्यालय रसोइया, खेत मजदूर, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहित विभिन्न श्रमिक संगठनों के सदस्य शामिल थे। हड़ताल का नेतृत्व सीटू के राज्य अध्यक्ष नरेश यादव, ऐक्टू के जिला संयोजक बासुदेव राय, विद्यालय रसोइया संघ के जिला सचिव मोहम्मद हैदर, एटक के महासचिव सूर्य मोहन रावत तथा भाकपा माले नेता बाबू साहब सिंह ने संयुक्त रूप से किया। सभा की अध्यक्षता नरेश यादव ने की, जबकि संचालन बाबू साहब सिंह ने किया। श्रम कोड्स को ‘श्रमिकों को गुलाम बनाने वाला दस्तावेज’ करार दिया सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले के जिला सचिव शंभू शरण सिंह, सीपीआई के गजाधर रजक और सीपीएम नेता नागेश्वर महतो ने चारों श्रम कोड को ‘काला कानून’ बताया। भाकपा माले के युवा नेता बाबू साहब सिंह ने इन श्रम कोड्स को ‘श्रमिकों को गुलाम बनाने वाला दस्तावेज’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी से पहले और बाद में श्रमिक संगठनों के संघर्ष से मिले 29 श्रम कानूनों के अधिकारों को इन चार श्रम संहिताओं के जरिए समाप्त किया जा रहा है। ”बिना सरकारी अनुमति कर्मचारियों को हटाने की छूट दी गई” नेताओं ने नए प्रावधानों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 300 से कम कर्मचारियों वाली कंपनियों को बिना सरकारी अनुमति कर्मचारियों को हटाने की छूट दी गई है, जिससे ‘हायर एंड फायर’ नीति को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, हड़ताल और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार सीमित होने तथा काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 घंटे किए जाने की आशंका भी जताई गई। सामाजिक सुरक्षा से असंगठित मजदूरों के बाहर होने और कॉरपोरेट नियंत्रण बढ़ने की बात भी कही गई। इस अवसर पर नवल किशोर सिंह, मुरारी तुरी, जयराम तुरी, जयप्रकाश रावत, कृष्णदेव यादव, शोभा देवी, ममता देवी, किरण गुप्ता, मीना देवी, इंदु देवी, प्रेमलता देवी, शांति देवी, रीना देवी, शकुना देवी और नीतेश्वर आजाद सहित कई अन्य श्रमिक नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।
Source link