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मोतिहारी में एक भवन में चल रहा स्कूल एक कमरे में कई कक्षाएं कमरों में बच्चे पढ़ने को मजबूर…




बिहार सरकार और शिक्षा विभाग शिक्षा में सुधार के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। मोतिहारी से शिक्षा व्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो हैरान करने वाली है। ढाका प्रखंड के कुसमहवा उर्दू विद्यालय परिसर में स्थिति इतनी बदतर है कि महज चार कमरों के भवन में चार अलग-अलग विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। यहां एक ही कमरे में एक साथ पांच कक्षाओं के बच्चे बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षक भी सभी कक्षाओं को एक साथ पढ़ाने को मजबूर हैं, जिससे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है। मौके पर पहुंची हमारी टीम ने पाया कि एक ही कमरे में अलग-अलग स्कूलों के छात्र ठूंसे हुए थे, जिससे पढ़ाई का माहौल पूरी तरह बाधित था। एक कमरे में पढ़ते है कक्षा 2-3 के छात्र विद्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, कुसमहवा वार्ड संख्या दो और तीन के छात्र एक ही कमरे में पढ़ते हैं। आधे बच्चे आगे की ओर मुंह करके बैठे होते हैं तो आधे पीछे की ओर। इस अव्यवस्थित माहौल में न तो पढ़ाई हो पाती है और न ही बच्चों को सही ज्ञान मिल पाता है। जब इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाध्यापक से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उनका स्पष्ट कहना था कि अगर वे कुछ बोलेंगे तो उन्हें निलंबित कर दिया जाएगा। यह स्थिति शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती है। 233 छात्र को 11 शिक्षक पढ़ा रहे एक कमरे के गेट पर “एनपीएस कुसमहवा वार्ड तीन और चार” लिखा हुआ मिला। पूछने पर बताया गया कि इस एक कमरे में दो विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है, जिसमें कुल 233 छात्र नामांकित हैं और 11 शिक्षक किसी तरह से पढ़ाई करा रहे हैं। उन्हें अलग भवन उपलब्ध होने तक इसी तरह काम चलाना पड़ रहा है। इसी के बगल वाले कमरे में “नया टोला कुसमहवा” विद्यालय संचालित हो रहा है, जहां 130 छात्र नामांकित हैं और केवल चार शिक्षक तैनात हैं। 4 कमरों में 800 बच्चे पढ़ने को मजबूर वहीं ऊपर के दो कमरों में उत्क्रमित मध्य विद्यालय कुसमहवा उर्दू का संचालन हो रहा है, जहां कुल 470 छात्र नामांकित हैं और मात्र छह शिक्षक पढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कुल मिलाकर चार कमरों में लगभग 800 से अधिक बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। पढ़ाई के नाम पर खेलकर चले जाते छात्र ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति काफी दिनों से बनी हुई है। बच्चे स्कूल तो आते हैं, लेकिन पढ़ाई के नाम पर ज्यादातर समय खेलकर ही चले जाते हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बच्चों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ हो रहा है। इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार शिकायत भी की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मामले को लेकर जब जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन गिरी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि विद्यालय के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। जैसे ही जमीन उपलब्ध होती है, वैसे ही स्कूल को अलग स्थान पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। हालांकि सवाल यह है कि तब तक इन बच्चों का भविष्य कौन संवारेगा।



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