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मधेपुरा में बुधवार को छात्र-युवाओं ने यूजीसी के नए नियमों को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर आक्रोश मार्च निकाला। यह मार्च दोपहर 2 बजे बीएन मंडल विश्वविद्यालय परिसर से शुरू हुआ। प्रदर्शनकारी कॉलेज चौक, भूपेंद्र चौक, बीपी मंडल चौक और कलेक्ट्रेट होते हुए कला भवन पहुंचे। पूरे मार्ग में उन्होंने यूजीसी कानून के समर्थन में नारे लगाए और इसे तुरंत लागू करने की मांग की। मार्च में शामिल युवाओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद यूजीसी ने बहुसंख्यक पिछड़े समाज के हित में एक सशक्त कानून पेश किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग साजिश के तहत इसे रोकने का प्रयास कर रहे हैं। अल्पसंख्यक समाज के छात्र-युवा चुप नहीं बैठेंगे
युवाओं ने चेतावनी दी कि जब तक यूजीसी का यह कानून पूरी तरह लागू नहीं हो जाता, तब तक एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक समाज के छात्र-युवा चुप नहीं बैठेंगे। छात्रों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रखने और जरूरत पड़ने पर इसे और तेज करने की बात कही। गौरतलब है कि 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालयों में भेदभाव रोकने से जुड़े यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि नियमों के प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका है। यूजीसी ने वर्ष 2012 के नियमों में संशोधन करते हुए 13 जनवरी 2026 को ये नए नियम जारी किए थे। छात्रों के बीच मतभेद भी सामने आ रहे
यूजीसी के इन नए नियमों को लेकर छात्रों के बीच मतभेद भी सामने आ रहे हैं। एक वर्ग इन नियमों को आवश्यक बताते हुए समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसका विरोध कर रहा है। नए नियमों के तहत प्रत्येक कॉलेज में ‘इक्वल अपॉर्च्युनिटी सेंटर’ स्थापित करने का प्रावधान है। यह केंद्र पिछड़े और वंचित वर्ग के छात्रों को पढ़ाई, फीस और भेदभाव से संबंधित समस्याओं में सहायता प्रदान करेगा। आक्रोश मार्च में युवा नेता निशांत यादव, निखिल यादव, वसीमुद्दीन उर्फ नन्हें, कृष्णा कुमार, पावेल कुमार, मो. अबुजर, राहुल पासवान, जितेंद्र कुमार शुभम स्टालिन सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे।
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