![]()
नवादा में 03 फरवरी की रात मुस्लिम समुदाय ने शब-ए-बारात का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया। इस पवित्र रात को रहमत, मग़फ़िरत और बरकतों की रात माना जाता है। जिले भर की मस्जिदों, इमामबाड़ों और घरों में नमाज-ए-तरावीह, कुरान ख्वानी, तस्बीह और दुआओं का सिलसिला जारी रहा। लोगों ने अपने गुनाहों की माफी, परिवार की सलामती, समाज में सद्भाव और देश में अमन-चैन के लिए दुआएं मांगीं। इस अवसर पर पूर्व एमएलसी सलमान रागिव ने नवादा जिले के लिए विशेष इबादत की और दुआएं मांगीं। उन्होंने कहा कि यह रात आपसी भाईचारे, मोहब्बत और इंसानियत की याद दिलाती है। रागिव ने नवादा में हिंदू-मुस्लिम सद्भाव कायम रहने, किसी भी तरह के विवाद से बचने और जिले की तरक्की के लिए प्रार्थना की। सामूहिक इबादत और दुआ सभाओं का आयोजन किया गया शब-ए-बारात इस्लामिक कैलेंडर की 15 शाबान की रात होती है, जिसे ‘रात-ए-बरात’ या ‘मग़फ़िरत की रात’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात अल्लाह तआला बंदों के नाम-ए-आमाल में फैसला फरमाता है और दुआएं क़ुबूल होने की उम्मीद बढ़ जाती है। नवादा में कई स्थानों पर सामूहिक इबादत और दुआ सभाओं का आयोजन किया गया, जिनमें युवा, बुजुर्ग और बच्चे शामिल हुए। नवादा सदियों से सद्भाव का उदाहरण रहा है, जहां होली, ईद और शब-ए-बारात जैसे त्योहार मिल-जुलकर मनाए जाते हैं। समाजसेवी और धार्मिक नेताओं ने इस रात को सद्भाव का संदेश फैलाने का अवसर बताया।
Source link