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उपमुख्यमंत्री से वार्ता खत्म हुई राजस्व सेवा संघ की हड़ताल पद और दायित्व बदले जाने पर थी नाराजगी सदस्यीय जांच कमेटी की घोषणा…




बिहार राजस्व सेवा संघ की ओर से 2 फरवरी से प्रस्तावित हड़ताल शाम होते होते उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा से वार्ता के बाद समाप्त कर दी गई। इस दौरान प्रधान सचिव सीके अनिल और सचिव जय सिंह भी मौजूद थे। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने संघ के प्रतिनिधियों से शांतिपूर्वक बारी-बारी से उनकी आपत्तियों और आशंकाओं को गंभीरता से सुना। निष्पक्ष जांच के लिए विभागीय सचिव के नेतृत्व में 3 सदस्यीय जांच कमेटी के गठन की घोषणा की। मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि जनता की विभाग से बहुत अपेक्षा है। अभी तेज गति से जनता का काम होना शुरू हुआ है। काम बेहतर होगा तो सभी का सम्मान होगा। जैसे मैं काम लेता हूं वैसे ही सम्मान भी देता हूं। बैठक के दौरान संघ के प्रतिनिधियों ने मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए अनुमंडल राजस्व पदाधिकारी पद के गठन के निर्णय से जुड़े मुद्दों को विस्तार से रखा। उपमुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि सरकार न्यायालय के आदेशों, सेवा नियमावली की मूल भावना और संवर्गीय संतुलन का पूरा सम्मान करती है और किसी भी अधिकारी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। वार्ता से पहले संघ ने कड़ा विरोध जताया था डिप्टी सीएम से वार्ता से पहले बिहार राजस्व सेवा संघ (बिरसा) ने राज्य सरकार के एक हालिया फैसले को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। 29 जनवरी को मंत्रिपरिषद की बैठक हुई थी। संघ ने कहा है कि इसमें लिए गए निर्णय संख्या-23-30 के आलोक में राजस्व अधिकारियों के पदों, दायित्वों और संरचना में किए गए बदलाव न्यायालय के आदेशों और सेवा नियमों के खिलाफ हैं। संघ के अनुसार, सरकार ने राजस्व अधिकारियों को डीसीएलआर, डीएलएओ और अन्य तकनीकी पदों से हटाकर गैर-तकनीकी कार्यों में लगाए जाने का निर्णय लिया गया है, जिससे कार्यक्षमता और प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। संघ का कहना है कि यह फैसला बिना अधिकारियों से परामर्श किए लिया गया, जो ठीक नहीं है। बिहार राजस्व सेवा संघ ने घोषणा की थी कि यदि सरकार ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो 2 फरवरी से राज्य के सभी जिलों में राजस्व सेवा के अधिकारी सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे।
पत्र के जरिए आपत्ति पहले जताई गई थी बिहार राजस्व सेवा संघ ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह आंदोलन किसी पद या वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर नहीं है, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था, सेवा शर्तों की सुरक्षा और न्यायालय के आदेशों के पालन को लेकर है। सरकार के इस फैसले से राजस्व प्रशासन कमजोर होगा और आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। संघ ने बताया कि हमने पहले ही 24 सितंबर 2025 को राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को इस विषय में पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई।



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