
Ajit Pawar Plane Crash: किसी ने सही ही कहा है कि होनी को कौन टाल सकता है। जब जो होना है वो हो कर रहता है। बीते दिनों बारामती में हुए प्लेन क्रैश हादसे ने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर कर रख दिया है। दुर्घटना में डिप्टी सीएम अजित पवार की मौत हो गई। उनके साथ प्लेन में सवार दोनों पायलट सुमित कपूर, शांभवी पाठक, फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली, अजित पवार के सिक्योरिटी गार्ड विदिप जाधव शामिल रहे। इस हादसे को लेकर अब खुलासा हो रहा है कि असल में वो प्लेन सुमित कपूर उड़ाने ही नहीं वाले थे। पहले किसी दूसरे कैप्टन को विमान उड़ाना था, लेकिन ऐन वक्त पर यह फैसला बदला गया।
अजित पवार बुधवार (28 जनवरी) को चुनावी रैली को संबोधित करने के लिए मुंबई से बारामती अपने चार्टर्ड प्लेन से जा रहे थे। लैंडिंग से पहले विमान दुर्घटना का शिकार हो गया। प्लेन में जोरदार धमाका हुआ और देखते ही देखते आग का गोला बन गया।
आखिरी समय पर क्यों प्लेन उड़ाने को कहा गया?
यह दुर्घटना किन कारणों से हुई, इसकी जांच फिलहाल की जा रही है। इस बीच चौंकाने वाली जानकारी पायलट को लेकर सामने आई है। बताया जा रहा है कि अजित दादा का वो प्लेन कैप्टन सुमित कपूर नहीं उड़ाने वाली थे। उनके दोस्तों के मुताबिक, उनको आखिरी समय में दूसरे पायलट की जगह इस उड़ान के लिए भेजा गया था।
दरअसल, जिस पायलट को विमान उड़ाना था वह ट्रैफिक में फंस गया था। कैप्टन सुमित कपूर हाल ही में हांगकांग से लौटे थे। वो दिल्ली के रहने वाले थे।
‘कैप्टन सुमित बहुत अनुभवी पायलट थे’
सुमित के दोस्तों ने यह भी बताया कि सुमित को उड़ान से गहरा लगाव था। वह एक बेहद अनुभवी पायलट थे, ऐसे में उनसे गलती होने की संभावना काफी कम थी। उन्होंने हादसे की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है।
बुधवार सुबह करीब 8 बजे लेयरजेट 45 विमान में मुंबई से उड़ान भरी थी। ये विमान दिल्ली की VSR वेंचर का था। हादसा सुबह करीब 8:45 बजे बारामती एयरपोर्ट पर दूसरी बार लैंडिंग की कोशिश के दौरान हुआ।
कैप्टन सुमित कपूर इस उड़ान के लिए मुख्य पायलट (पायलट-इन-कमांड) थे। उनके पास 16,500 घंटों से अधिक उड़ान का लंबा अनुभव था। वहीं, शाम्भवी पाठक इस विमान में ‘फर्स्ट ऑफिसर’ या को-पायलट के रूप में तैनात थीं। शाम्भवी ने न्यूजीलैंड से ट्रेनिंग पूरी की थी।
सुमित कपूर के परिवार के बारे में बात करें तो उनके बेटे और बेटी दोनों शादीशुदा हैं। उनका बेटा और दामाद भी पायलट ही हैं। बताया जा रहा है कि कैप्टन सुमित की कलाई पर बंधे ब्रेसलेट से उनके शव की पहचान हुई थी।