NEET छात्रा से रेप और मौत का मामला अब सिर्फ एक संदिग्ध घटना नहीं रह गई है। PMCH की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, FSL के साइंटिफिक इनपुट और प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल की नर्स की बातचीत तीनों मिलकर पुलिस की शुरुआती ‘आत्महत्या’ थ्योरी को खारिज कर रहे हैं। शरीर पर
.
इलाज करने पहुंची डॉक्टर ने सीधे यही कहा- ऐसा लगता है कि अभी कुछ हुआ है, इसके साथ। इन सब स्थितियों के बावजूद SIT अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है। परिवार का आरोप है कि पुलिस जबरन सुसाइड घोषित कराने में लगी है। दबाव डाल रही है। एम्स अभी तक अपनी रिव्यू रिपोर्ट नहीं दे पाया है।
भास्कर ने ये जानने की कोशिश की कि PMCH की रिपोर्ट और नर्स की बताई बातों में कितनी समानता है, एम्स अभी तक अपनी रिपोर्ट क्यों नहीं दे पाया और एसआईटी की जांच में क्या खामियां चल रही हैं। पढ़िए रिपोर्ट…।

सबसे पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट: लंबे समय तक संघर्ष के निशान
पोस्टमार्टम में गर्दन, कंधे और चेस्ट पर Crescentic Nail Abrasions दर्ज हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ऐसे निशान तब बनते हैं, जब पीड़िता खुद को बचाने के लिए लगातार विरोध करती है। हमलावर उसे दबाकर पकड़ता है। यह चोटें बताती हैं कि छात्रा बेहोश नहीं थी।
चेस्ट और पीठ पर फैली खरोंच
रिपोर्ट में चेस्ट और पीठ पर कई जगह खरोंच और नीले निशान पाए गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह संकेत देता है कि पीड़िता को काफी देर तक दबाकर रखा गया या कठोर सतह पर रगड़ा गया। यह घटना कुछ सेकंड की नहीं, बल्कि लंबे समय की हिंसा दर्शाती है।
जननांग में ताजा और गहरी चोट
पोस्टमार्टम के अनुसार vaginal area में ताजा चोटें, टिशू ट्रॉमा और ब्लीडिंग पाई गई। मेडिकल बोर्ड की राय में ये चोटें सहमति से बने संबंध की नहीं, बल्कि forceful penetration का परिणाम हैं। इस बिंदु पर रिपोर्ट स्पष्ट रूप से sexual violence की पुष्टि करती है।
चोटें मौत से पहले की
रिपोर्ट में साफ लिखा है कि शरीर पर पाई गई सभी चोटें ante-mortem हैं, यानी मौत से पहले लगीं। इसका मतलब यह है कि छात्रा ने हमले के दौरान सक्रिय रूप से विरोध किया। यह तथ्य आत्महत्या या अचानक तबीयत बिगड़ने की थ्योरी से मेल नहीं खाता।
एक से ज्यादा लोगों की आशंका
डॉक्टरों का कहना है कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर फैली चोटें और संघर्ष के निशान इस बात की ओर इशारा करते हैं कि वारदात में एक से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। यह निष्कर्ष चोटों के पैटर्न और उनकी गंभीरता के आधार पर निकाला गया है।
कैथेटर से चोट की थ्योरी संदिग्ध
जननांग की चोट को कैथेटर से जोड़ने की संभावना पर विशेषज्ञ से राय मांगी गई है। डॉक्टरों के मुताबिक, कैथेटर से ऐसी गहरी और ताजा चोटें आमतौर पर नहीं होतीं। यही कारण है कि इस एंगल पर अलग से विशेषज्ञ मंतव्य की जरूरत बताई गई है।
मौत कैसे हुई अभी तक खुलासा नहीं
पोस्टमार्टम के अंत में डॉक्टरों ने लिखा है कि यौन शोषण की पुष्टि होती है, जबकि मौत का अंतिम कारण विसरा रिपोर्ट पर निर्भर है। यानी मौत कैसे हुई, यह जांच का विषय है, लेकिन यह तय है कि छात्रा के साथ जबरदस्ती हुई।
अब जानिए नर्स की बातचीत, इलाज के दौरान दिखा टॉर्चर और रेप का एंगल
प्राइवेट पार्ट में झाग और ब्लड
नर्स के अनुसार, जब छात्रा को अस्पताल लाया गया, तब प्राइवेट पार्ट में हल्का ब्लड और झाग जैसा पदार्थ था। नर्स ने इसे स्पर्म जैसा बताया। मॉर्निंग केयर के दौरान यह साफ दिखा कि मामला पीरियड्स का नहीं, बल्कि रेप जैसा था।
लेडी डॉक्टर का शुरुआती शक
नर्स के मुताबिक, लेडी डॉक्टर ने जांच के दौरान कहा था कि या तो छात्रा ने अबॉर्शन की दवा ली है या जबरन अबॉर्शन कराया गया है। डॉक्टर का यह रिएक्शन देखकर स्टाफ भी चौंक गया, क्योंकि जननांग में घाव जैसे निशान दिख रहे थे।
इशारों में मां को बताया ‘कुछ गलत हुआ’
नर्स ने बताया कि वेंटिलेटर पर रहते हुए छात्रा ने इशारों में अपनी मां को संकेत दिया कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है। मां के पूछने पर वह रोने लगी। यह बयान उस वक्त का है, जब छात्रा कुछ समय के लिए होश में आई थी।
होश में आने के बाद फिर कोमा
नर्स के अनुसार, होश में आने के कुछ समय बाद छात्रा फिर से कोमा में चली गई। यह कैसे हुआ, इस पर अस्पताल में भी सवाल उठे। नर्स का कहना है कि यह बिंदु अपने-आप में जांच का विषय है।
नींद के इंजेक्शन पर सवाल
नर्स ने बताया कि रात में मरीजों को नींद का इंजेक्शन दिया जाता है। छात्रा को क्या दिया गया, यह उन्हें नहीं पता। लेकिन होश में आने के बाद अचानक कोमा में जाना, इलाज की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
खर्च उठाने की पेशकश
नर्स के मुताबिक, एक महिला छात्रा की मां से मिलने आई और इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात कही। मां ने जवाब दिया- ’हमें पैसा नहीं, हमारी बेटी चाहिए।’ इसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और स्टाफ को साइड कर दिया गया।
सच बोलने पर धमकी
नर्स ने कहा कि इस बातचीत के सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से उन्हें धमकियां मिल रही हैं। हॉस्पिटल न आने पर FIR की धमकी दी जा रही है। नर्स का कहना है कि वह डर गई है। क्योंकि पुलिस भी वहां पहरेदारी कर रही है।

अब SIT की 5 बड़ी खामियां, जो अब तक सच तक नहीं पहुंच पाईं
1- शुरुआती सुसाइड थ्योरी पर अड़े रहना
पोस्टमार्टम और मेडिकल संकेतों के बावजूद पुलिस लंबे समय तक आत्महत्या की थ्योरी पर टिकी रही। इससे न सिर्फ जांच की दिशा भटकी, बल्कि अहम सबूत जुटाने में भी देरी हुई। ऐसे मामलों में शुरुआती घंटों की चूक पूरे केस को कमजोर कर देती है।
2- अस्पताल के ऑन-ग्राउंड सबूत को नजरअंदाज करना
प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल में इलाज के दौरान स्टाफ को यौन शोषण के स्पष्ट संकेत दिखे। इसके बावजूद पुलिस ने तुरंत उस एंगल पर केस नहीं बढ़ाया। नर्स और डॉक्टरों के शुरुआती इनपुट को गंभीरता से नहीं लिया गया।
3- FIR में देरी और सीन ऑफ क्राइम की सुरक्षा न करना
घटना के तीन दिन बाद FIR दर्ज हुई। इस दौरान हॉस्टल का कमरा सील नहीं हुआ। CCTV और अन्य साक्ष्य समय पर जब्त नहीं किए गए। इससे साक्ष्य से छेड़छाड़ की आशंका बढ़ी।
4- CCTV और डिजिटल डेटा का स्लो एनालिसिस
5 जनवरी की रात 9.30 से 6 जनवरी सुबह 4 बजे तक का CCTV फुटेज सबसे अहम है, लेकिन अब तक इसकी एनालिसिस का स्पष्ट निष्कर्ष नहीं आया। DVR की फॉरेंसिक जांच और डंप डेटा का विश्लेषण भी समय पर सामने नहीं लाया गया।
5- परिवार वालों पर ही दबाव बनाती रही पुलिस
परिवार का आरोप है कि उनसे बार-बार एक जैसे सवाल पूछे गए, लेकिन असली संदिग्धों पर उतनी तेजी से कार्रवाई नहीं हुई। नर्स जैसे गवाहों को सुरक्षा देने के बजाय उन पर दबाव की शिकायतें सामने आईं, जिससे जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
अब जानिए एम्स की रिपोर्ट क्यों नहीं आ पा रही है
सभी मेडिकल दस्तावेज एम्स को नहीं सौंपे गए
सूत्रों के मुताबिक, SIT अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेदांता की पूरी डेथ समरी, प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के इलाज से जुड़े सभी चार्ट और नर्सिंग नोट्स एम्स पटना को एक साथ उपलब्ध नहीं करा पाई है। अधूरी फाइल के कारण एम्स विशेषज्ञों की राय आने में देरी हो रही हे।
फॉरेंसिक और ट्रीटमेंट रिकॉर्ड में गैप
एम्स से विशेषज्ञ राय लेने के लिए FSL रिपोर्ट, विसरा जांच, हिस्टोपैथोलॉजी और वजाइनल स्लाइड की रिपोर्ट अनिवार्य होती है। SIT इन सभी दस्तावेजों को इकट्ठा कर एम्स को भेजने की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाई है, जिससे मेडिकल ओपिनियन में तकनीकी देरी हो रही है।
एम्स की राय के बिना जांच अधर में
एम्स का ओपिनियन तय करेगा कि जननांग में चोटें क्यों लगीं। दवाओं का असर कितना था और मौत का असली वजह क्या रहा। जब तक SIT पूरी केस डायरी और मेडिकल फाइल एम्स को नहीं सौंपती तब तक जांच निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंच पाएगी।
