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मुजफ्फरपुर के जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) सुधीर कुमार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 19 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया। उत्तर बिहार विशेष निगरानी कोर्ट ने गुरुवार को निगरानी ब्यूरो की चार दिनों की रिमांड अर्जी पर सुनवाई के बाद उन्हें दो दिनों की पुलिस रिमांड पर लेने का फैसला सुनाया। आज से डीएओ को रिमांड पर भेजा गया है। रिमांड के दौरान निगरानी अधिकारी सुधीर कुमार से उनकी संपत्ति और निवेश के स्रोतों के बारे में गहन पूछताछ करेंगे। यह जांच उनकी आय से अधिक संपत्ति के पहलुओं को भी कवर करेगी। निजी आवास से पकड़े गए थे निगरानी विभाग की टीम ने 3 जनवरी को मुजफ्फरपुर के जगदीशपुरी स्थित सुधीर कुमार के निजी आवास पर जाल बिछाया था। डीएओ को साहेबगंज में तैनात आत्मा के तकनीकी सहायक संतोष कुमार से 19 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद पटना स्थित उनके आवास पर भी छापेमारी की गई। इस दौरान जांच अधिकारियों को 13 लाख रुपये नकद, 250 ग्राम सोने-चांदी के गहने, कई बैंक खातों के दस्तावेज और बेनामी संपत्ति के कागजात बरामद हुए हैं। मामला संतोष कुमार के पुनर्नियोजन (Re-instatement) से जुड़ा है। डकरामा गांव निवासी संतोष कुमार 2019 में भ्रष्टाचार के एक मामले में कटरा से निलंबित होकर जेल जा चुके थे। 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी जेल से बाहर आने के बाद उन्हें दोबारा सेवा में बहाल करने के लिए डीएओ सुधीर कुमार ने 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। इसी सौदे की पहली किस्त के रूप में 19 हजार रुपये लेते समय सुधीर कुमार को निगरानी टीम ने गिरफ्तार किया। अब होगा बेनामी संपत्ति का हिसाब जेल में बंद सुधीर कुमार से अब निगरानी की टीम रिमांड के दौरान यह उगलवाने की कोशिश करेगी कि पटना और मुजफ्फरपुर के अलावा उन्होंने और कहां-कहां निवेश किया है। बरामद किए गए प्रॉपर्टी के कागजात और बैंक खातों के ट्रांजेक्शन की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। निगरानी विभाग को अंदेशा है कि अधिकारी ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर पद पर रहते हुए आय से अधिक काफी संपत्ति अर्जित की है। अगले दो दिनों शुक्रवार और शनिवार की पूछताछ सुधीर कुमार के लिए काफी अहम होने वाली है, क्योंकि इसमें कई अन्य सफेदपोशों और बिचौलियों के नाम सामने आने की भी संभावना है। फिलहाल, इस कार्रवाई से कृषि विभाग और प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मचा हुआ है।
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