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बीएसईबी इस साल मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा को पूरी तरह नए और सख्त तरीके से करवाने वाली है। इस बार परीक्षा केवल किताबों और सवालों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि समय की पाबंदी, तकनीकी निगरानी और दस्तावेजों की शुद्धता भी सफलता की अनिवार्य शर्त बनेगी। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि 2026 की परीक्षा में लापरवाही, फर्जीवाड़ा और अनुशासनहीनता के लिए कोई जगह नहीं होगी। बिहार बोर्ड ने परीक्षा को कदाचारमुक्त बनाने के लिए प्रवेश नियमों को पहले से ज्यादा सख्त कर दिया है। परीक्षा की तारीखें पहले से तय पहली पाली की परीक्षा सुबह 9:30 बजे शुरू होगी, लेकिन परीक्षार्थियों को सुबह 8:30 बजे तक ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जाएगा। सुबह 9 बजे गेट पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं मिलेगा, चाहे कारण कुछ भी हो। वहीं, दूसरी पाली की परीक्षा दोपहर 2 बजे से होगी। इसके लिए 1 बजे से प्रवेश शुरू होगा और 1:30 बजे के बाद केंद्र के गेट बंद कर दिए जाएंगे। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि देर से पहुंचने की जिम्मेदारी पूरी तरह परीक्षार्थी की होगी। इंटरमीडिएट (12वीं) की परीक्षा: 1 फरवरी से 13 फरवरी 2026 मैट्रिक (10वीं) की परीक्षा: 17 फरवरी 2026 से बोर्ड ने छात्रों को सलाह दी है कि वे परीक्षा तिथि से पहले केंद्र का रास्ता, समय और नियम अच्छी तरह समझ लें, ताकि अंतिम समय में किसी तरह की परेशानी न हो। रिकॉर्ड संख्या में परीक्षार्थी इस बार बिहार बोर्ड की परीक्षाओं में रिकॉर्ड संख्या में छात्र शामिल होंगे। मैट्रिक एग्जाम में 15 लाख 12 हजार 963 परीक्षार्थी शामिल होंगे, जिनके लिए राज्यभर में 1,699 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इंटरमीडिएट परीक्षा में 13 लाख 17 हजार 846 छात्र-छात्राएं परीक्षा देंगे। इसके लिए 1,762 केंद्र निर्धारित किए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए बोर्ड ने सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर व्यापक तैयारी की है। परीक्षा केंद्रों पर पुख्ता इंतजाम परीक्षा केंद्रों पर इस बार कई स्तर की निगरानी व्यवस्था लागू होगी। हर केंद्र पर दंडाधिकारी, पुलिस बल और परीक्षा पदाधिकारी तैनात रहेंगे। संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था की गई है। सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिनकी निगरानी कंट्रोल रूम से की जाएगी। परीक्षा हॉल में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, इयरफोन, कैमरा या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। प्रवेश से पहले परीक्षार्थियों की सघन जांच की जाएगी। महिला परीक्षार्थियों के लिए महिला सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगी। वेब सिस्टम और डिजिटल निगरानी बिहार बोर्ड 2026 में परीक्षा को पूरी तरह डिजिटल निगरानी से जोड़ रहा है। इसमें ऑनलाइन फॉर्म भरने, एडमिट कार्ड जारी करने, उपस्थिति दर्ज करने, उत्तर पुस्तिकाओं के मूवमेंट, रिजल्ट प्रोसेसिंग, हर चरण को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इससे मानवीय गलती और गड़बड़ी की संभावना काफी कम हो जाएगी। AI से फर्जी सर्टिफिकेट पर बड़ा प्रहार बिहार बोर्ड का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करना है। 2026 से बोर्ड एआई की मदद से फर्जी सर्टिफिकेट और डुप्लीकेट परीक्षार्थियों को पकड़ेगा, जो छात्र नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि या फोटो बदलकर एक से अधिक बार मैट्रिक या इंटर की परीक्षा दे चुके हैं, उन्हें एआई सिस्टम तुरंत चिह्नित कर लेगा। 1985-86 तक के रिकॉर्ड की जांच बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने बताया कि एआई सिस्टम 1985-86 तक के पुराने सर्टिफिकेट की भी जांच करेगा। नाम, पता, जन्म तिथि, फोटो, सिग्नेचर और आधार डेटा का मिलान कर फर्जी सर्टिफिकेट्स को पकड़ा जाएगा। बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने पहले ही कहा है कि, ‘एआई के आने से बोर्ड का काम तेज, पारदर्शी और सटीक होगा। छोटी-सी गड़बड़ी भी पकड़ में आ जाएगी।’ फर्जी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई अगर कोई सर्टिफिकेट फर्जी पाया गया, तो संबंधित सर्टिफिकेट तत्काल रद्द कर दिया जाएगा, उस आधार पर प्राप्त अन्य सभी प्रमाणपत्र अमान्य होंगे। फर्जी सर्टिफिकेट से ली गई सरकारी नौकरी समाप्त की जा सकती है। पुलिस, शिक्षक, राजस्व जैसे विभागों में फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर नियुक्ति अवैध घोषित होगी। पहले भी सामने आए हैं मामले बोर्ड के अनुसार, जब से सर्टिफिकेट ऑनलाइन हुए हैं, तब से सत्यापन, डेटा एंट्री और कोर्ट केस के दौरान कई फर्जी सर्टिफिकेट पकड़े जा चुके हैं। हालांकि इनका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन एआई के आने के बाद ऐसे मामलों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
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