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बस कुछ घंटों का और इंतजार भारत यूरोपीय संघ के बीच होगा ट्रेड डील का ऐलान क्यों कहा जा रहा इसे मदर ऑफ…


India- EU deal

India- EU deal | Image:
ANI

India-EU Deal: मंगलवार (27 जनवरी) को दुनिया की नजरें भारत पर टिकी रहेंगी। भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच बड़ी डील का ऐलान चल रहा है, जो करीब 20 सालों से अटकी थी। इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ भी कहा जा रहा है। भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान इस ऐतिहासिक ट्रेड डील का ऐलान किया जा सकता है।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा इस वक्त दिल्ली में हैं। दोनों ने कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।

भारत-ईयू के बीच ‘सबसे बड़ी डील’

मंगलवार (27 जनवरी) को भारत-ईयू शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सम्मेलन में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की मेजबानी करेंगे। इस शिखर वार्ता में भारत और ईयू के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का ऐलान होने की संभावना है।

भारत आने से पहले यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन इसे सबसे बड़ी डील बता चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि यह ऐतिहासिक समझौता 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा, जो ग्लोबल जीडीपी का लगभग एक चौथाई हिस्सा होगा।

बता दें कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत 2007 में शुरू की थी, लेकिन महत्वाकांक्षाओं में अंतर की वजह से 2013 में इसे स्थगित कर दिया गया। जून 2022 में फिर से बातचीत की शुरुआत हुई।

डील से क्या होगा फायदा? 

भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से दोनों तरफ के व्यापार को बड़ा फायदा होगा। भारतीय कंपनियों और निर्यातकों को यूरोप के बाजारों में अपने सामान ज्यादा आसानी से बेचने का मौका मिलेगा, खासकर उन सेक्टरों में जहां अभी बहुत ज्यादा टैक्स (शुल्क) लगते हैं। इससे भारतीय टेक्सटाइल, कपड़े, लेदर प्रोडक्ट्स, हीरे-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग सामान और प्रोसेस्ड फूड जैसे उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी और वे ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन पाएंगे।

रॉयटर्स और यूरोपीय अधिकारियों की रिपोर्ट्स के अनुसार, इस डील का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि भारत यूरोप से आने वाली कारों पर लगने वाले आयात शुल्क को काफी कम करने को तैयार है। अभी भारत में पूरी बनी हुई कारों पर 70% से 110% तक ड्यूटी लगती है, लेकिन नए प्रस्ताव में 15,000 यूरो से महंगी कुछ सीमित यूरोपीय कारों पर यह शुल्क तुरंत 40% तक घट सकता है, और आगे चलकर धीरे-धीरे 10% तक पहुंच जाएगा।

इस समझौते से यूरोप की कंपनियां भारत में सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और डिफेंस जैसे क्षेत्रों में अपनी फैक्टरियां लगा सकेंगी।दूसरी तरफ, यूरोपीय कारें, वाइन और स्पिरिट्स जैसी चीजें भारत में सस्ती हो जाएंगी क्योंकि उन पर लगने वाला आयात टैक्स कम होगा। इससे ये प्रोडक्ट्स भारतीय बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो सकते हैं।

27 देशों से डील

यूरोपीय संघ (EU) दुनिया का एक बहुत बड़ा और मजबूत बाजार है, जिसमें जर्मनी, फ्रांस, इटली समेत कुल 27 विकसित देश शामिल हैं। इनकी कुल GDP लगभग 22-23 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है (2026 के अनुमान के अनुसार), और यहां की आबादी करीब 45 करोड़ (450 मिलियन) है। जब भारत जैसा देश EU के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से जुड़ता है, तो यह दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र बन जाता है।

ट्रंप को लगेगा झटका?

ये डील ऐसे समय में हो रही है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ को हथियार बनाकर कई देशों को घुटने पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप के आक्रामक टैरिफ से भारत काफी प्रभावित हैं। भारत पर अमेरिका ने 50% का भारी भरकम टैरिफ पहले ही लगाया हुआ है। ऐसे में यूरोपीय यूनियन के साथ ये डील ट्रंप के मंसूबों पर पानी फेर सकती है।

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