
Bhairav Battalion: आज 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में दुनिया ने नए भारत की ताकत देखी। यहां हजारों सौनिकों का कदमताल, गरजते लड़ाकू विमान और देश की विविधता को दर्शाती रंग-बिरंगी झांकियां आकर्षण का केंद्र रही। इन सबके बीच पहली बार कर्तव्य पथ पर उतरी भैरव बटालियन ने सभी का ध्यान खींच लिया।
दुश्मनों के लिए मौत का संदेश मानी जाने वाली भैरव बटालियन का गठन पिछले साल अक्तूबर में हुआ था। यह भारतीय सेना की एलीट कमांडो फोर्स है। भैरव बटालियन की टुकड़ी जैसे ही कर्तव्य पथ पर उतरी, नजारा अपने आप में अद्भुत रहा। इस बटालियन का नेतृत्व मेजर अंजुम ने किया।
भैरव बटालियन के जवानों के चेहरे रंगे हुए थे। उनके चेहरों पर लाल और गहरे हरे रंग की लकीरें खींची थी। इस तरह का रंग अंधेरे में पहाड़ों और जंगलों में दुश्मन को चकमा देने के लिए लगाया जाता है जिससे कि उन पर हमला किया जा सके। यह रंग एक तरह का कैमोफ्लाज पेंट होता है।
सेना की भैरव बटालियन क्यों खास?
भैरव बटालियन को देख लोग उनके बारे में जानने के लिए उत्सुक नजर आ रहे हैं। ऐसे में चलिए बताते हैं।
भारतीय सेना की ताकत लगातार बढ़ रही है। सीमाओं पर नई चुनौतियों (जैसे- नई तकनीक और तेज हमले) को ध्यान में रखते हुए सेना द्वारा 25 नई भैरव बटालियन बनाई जा रही है। निर्भीकता और आक्रामक रणनीति की प्रतीक ये बटालियन पैदल सेना को घातक और आधुनिक बनाने में मदद करेगी।
कैसे किया जाता है जवानों का चयन?
इस नए नवेले बटालियन के लिए जवानों का चयन सेना के अंदर से ही किया जाता है। खासकर एयर डिफेन्स, इन्फैंट्री, आर्टिलरी, सिग्नल्स और अन्य कॉम्बैटसपोर्ट आर्म्स से जवानों का चुनाव होता है। ये अत्याधुनिक हथियारों से लैस जवान स्पेशल ऑपरेशन्स और सरप्राइज अटैक में माहिर होते हैं।
पहली 5 बटालियन की तैनाती भारत की महत्वपूर्ण सीमाओं पर की गई है जिसमें लद्दाख, राजस्थान और कश्मीर शामिल है। यहां चीन और पाकिस्तान से ज्यादा खतरा रहता है। 3 कोर (दिमापुर), 12 कोर (जोधपुर), 14 कोर (लेह), 15 कोर (श्रीनगर), 16 कोर (नागरोटा) में की गई है।