
भारत आज हर्षोल्लास के साथ अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भव्य परेड का आयोजन किया जा रहा है। इस साल गणतंत्र दिवस की थीम वंदे मातरम के 150 साल रखी गई है। आईए इस खास दिन पर जानते हैं भारत के गणराज्य बनने की कहानी और संविधान लागू करने के लिए क्यों चुनी गई 26 जनवरी की तारीख…
भारत को भारत की जनता के हिसाब से चलाने के लिए 9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा का गठन किया गया था। भारत को आजादी तो 15 अगस्त 1947 को ही मिल गई थी। मगर, तब सिर्फ ब्रिटिश हुकूमत से स्वतंत्रता मिली थी। देश में कानून अभी भी अंग्रेजों वाले ही लागू थे। आजादी के तीन साल बाद वो समय भी आया जब भारतीय संविधान की रचना पूरी हुई और 26 जनवरी 1950 को इस देश में संविधान लागू किया गया।
26 जनवरी की तारीख के पीछे की कहानी
आज से ठीक 76 साल पहले, 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ था, जिसने देश को एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य का दर्जा दिया। लेकिन संविधान को 26 नवंबर 1949 में अपनाने के बाद भी इसे लागू करने के लिए 26 जनवरी की तारीख क्यों चुनी गई? इसके पीछे स्वतंत्रता संग्राम की एक गौरवशाली कहानी है, जो 1930 के ‘पूर्ण स्वराज’ से जुड़ी हुई है।
संविधान को लागू करने के लिए 26 जनवरी की तारीख चुनने के पीछे एक खास वजह थी। यह वो तारीख थी जो 1930 के ‘पूर्ण स्वराज’ के ऐतिहासिक विरासत को संजोए हुए थी। साल 1929 के लाहौर कांग्रेस अधिवेशन में पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ब्रिटिश सरकार के ‘डोमिनियन स्टेटस’ को सिरे से खारिज कर दिया और ‘पूर्ण स्वराज’ को अपना औपचारिक लक्ष्य घोषित किया। इसके ठीक एक साल बाद, 26 जनवरी 1930 को पूरे देश में पहली बार ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ मनाया गया।
पूर्ण स्वराज के लक्ष्य के लिए भारतीयों का समर्पण
लाखों भारतीयों ने सामूहिक शपथ ली कि वे ब्रिटिश शासन को नहीं मानेंगे और पूर्ण स्वतंत्रता हासिल करके रहेंगे। यह आंदोलन का एक निर्णायक पड़ाव था, जिसने आजादी की जंग को नई दिशा दी। भारतीयों ने ब्रिटिश शासन के अधीन उपनिवेश के दर्जे को नकारते हुए पूर्ण स्वराज के लक्ष्य के लिए खुद को समर्पित किया। संविधान सभा ने इसी ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए फैसला किया कि नया संविधान भी 26 जनवरी को ही लागू किया जाएगा। इस तरह, गणतंत्र दिवस न केवल संवैधानिक ढांचे की शुरुआत बना, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के उस संकल्प की याद भी दिलाता है।
संविधान को तैयार करने में लगा इतना समय
बता दें कि संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद और ड्राफ्टिंग सभा के अध्यक्ष बाबासाहेब अंबेडकर नियुक्त किए गए। संविधान तैयार करने का काम शुरू हुआ और 2 साल, 11 महीने और 17 दिनों तक लंबे संघर्ष और बहस के बाद 26 नवंबर 1949 को संविधान को अपना लिया गया। इस ऐतिहासिक कार्य को पूरा करने के 165 दिनों में 11 सत्र आयोजित किए गए। संविधान के मसौदे पर 114 दिन विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। जब 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ तो भारत औपचारिक रूप से एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया जिसने स्वतंत्र भारत में संवैधानिक शासन की शुरुआत हुई।