
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस संबोधन में उन्होंने संविधान, राष्ट्रीय एकता, महिला सशक्तिकरण, जनजातीय कल्याण, किसानों के योगदान और युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया।
राष्ट्रपति ने कहा कि 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य बना। संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्श आज भी देश की दिशा तय करते हैं। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के राष्ट्र एकीकरण कार्य की याद दिलाते हुए उनकी 150वीं जयंती के उत्सवों का जिक्र किया, जो राष्ट्रीय एकता को मजबूत कर रहे हैं।
‘जय हिंद’ का नारा राष्ट्र-गौरव का प्रतीक
संबोधन में राष्ट्रपति ने ‘वन्दे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर ‘पराक्रम दिवस’ के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ‘जय हिंद’ का नारा आज भी राष्ट्र-गौरव का प्रतीक है।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर जोर
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में अलग-अलग वर्गों के योगदान की सराहना की। उन्होंने सेना, पुलिस, किसानों, महिलाओं, डॉक्टरों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, श्रमिकों, युवाओं और प्रवासी भारतीयों का आभार व्यक्त किया। विशेष रूप से महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि
जनजातीय समुदायों के लिए ‘जनजातीय गौरव दिवस’, ‘आदि कर्मयोगी’ अभियान, सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन और एकलव्य मॉडल स्कूलों जैसे प्रयासों को लेकर राष्ट्रपति ने कहा कि ये योजनाएं जनजातीय समाज के सशक्तिकरण और मुख्यधारा में शामिल होने में सहायक हैं।
किसानों को देश का मेरुदंड बताते हुए उन्होंने उनकी मेहनत से खाद्यान्न आत्मनिर्भरता और निर्यात की सफलता पर प्रकाश डाला। राष्ट्रपति ने ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ के अवसर पर मतदान की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया और कहा कि बढ़ती महिला मतदाता भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत कर रही है।
उन्होंने सभी देशवासियों से आह्वान किया कि वे मिलकर विकसित और समावेशी भारत के निर्माण में योगदान दें। उन्होंने अपना संबोधन ‘जय भारत’ के नारे के साथ समाप्त किया।