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लालू यादव ने कर्पूरी ठाकुर को कपटी तेजस्वी के बयान पर बरसे डिप्टी सीएम विजय सिन्हा बोले अभी सदमे से बाहर निकले नहीं…



बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद लंबे समय तक चुप्पी साधे रहे नेता प्रतिपक्ष और RJD नेता तेजस्वी यादव अब  एक बार फिर से एक्टिव मोड में नजर आ रहे हैं। जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती के मौके पर RJD के पटना स्थित कार्यालय पहुंचे तेजस्वी ने कार्यकर्ताओं में जोश भरा। वहीं, पुराने अंदाज में उन्होंने ने NDA सरकार पर हमला बोला। तेजस्वी ने सरकार  संविधान को बदलने और लोकतंत्र को खत्म करने का आरोप लगाया। अब तेजस्वी के आरोप पर डिप्टी सीएम विजय सिन्हा का पलटवार आया है।

RJD कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, “कर्पूरी ठाकुर का सपना अब तक पूरा नहीं हुआ जिसे हमें भविष्य में पूरा करना है। बिहार में गरीबी, पलायन, बेरोजगारी की स्थिति है। लेकिन सरकार को कोई चिंता नहीं है क्योंकि सरकार में लगातार 20 साल से वही लोग हैं, जो कर्पूरी जी को गालियां देते थे। जिन्होंने कर्पूरी जी के विचार का विरोध किया। वे सिर्फ कुछ लोगों की बात करते हैं, सबकी बात नहीं करते। वे संविधान को बदलने और लोकतंत्र को खत्म करने की बात करते हैं।”

कर्पूरी ठाकुर, लालू यादव की तरह कभी नहीं झुके-तेजस्वी

उन्होंने आगे कहा कि चुनाव के आंकड़े भले ही उनके खिलाफ रहे हों, लेकिन बिहार की जनता का भरोसा आज भी उनके साथ है। तेजस्वी ने यह भी जोर दिया कि कर्पूरी ठाकुर, लालू प्रसाद यादव की तरह कभी नहीं झुके और वे भी कभी नहीं झुकेंगे। उन्होंने सरकार को 100 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि वे चुप हैं ताकि सरकार अपने वादे पूरे करे।

तेजस्वी के पिता कर्पूरी ठाकुर को कपटी कहते थे-विजय सिन्हा

बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने RJD नेता तेजस्वी यादव के बयान पर कहा, “कर्पूरी ठाकुर बिहार के सच्चे सपूत थे जिन्होंने ईमानदारी, सादगी और ‘सबका साथ, सबका विकास’, सरोकार से अपनी पहचान बनाई।प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया, इस तरह एक योग्य व्यक्ति को देश का सर्वोच्च सम्मान दिया और वह व्यक्ति जो नेता प्रतिपक्ष हैं, उनके पिता किसे कपटी कहते थे। वह दलितों और पिछड़े वर्गों को कैसे हतोत्साहित करते थे।”

विजय सिन्हा ने राहुल गांधी और तेजस्वी पर हमला बोलते हुए कहा कि, दोनों नेता अनुकंपा की राजनीति पर सोने की चम्मच लेकर पैदा हुए हैं। यह राजतंत्र के भाव से लोकतंत्र को बदलना चाहते हैं। जनता नाकार दी है। हार के सदमे में हैं, मगर अहंकार नहीं टूटा है।



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