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बीपीएससी की सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी परीक्षा में धांधली के मामले में ईओयू ने निजी वेंडर कंपनियों की संदिग्ध भूमिका पर जांच तेज कर दी है। बड़ा सवाल यह है कि उत्तरप्रदेश सिपाही भर्ती पेपर लीक कांड में जेल काट चुके बक्सर के सतीश यादव को बायोमेट्रिक का जिम्मा कैसे दे दिया गया? जयपुर की साई एजुकेयर को बीपीएससी ने बायोमेट्रिक का काम दिया था। साईं एजुकेयर ने पटना के करीब 10 परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक का ठेका सतीश यादव को दे दिया। ईओयू ने बीपीएससी से पूछा है कि क्या उसे जानकारी थी कि साईं एजुकेयर ने सतीश यादव को पेटी कांट्रैक्ट दिया है? ईओयू अब सतीश को रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। बीपीएससी साईं एजुकेयर को पहले ही ब्लैकलिस्टेड कर चुका है। अब ईओयू सतीश से जुड़े बेउर के आरकेआर सॉल्यूशन्स को सील करने की तैयारी कर रही है। इसी ऑनलाइन परीक्षा केंद्र पर एईडीओ परीक्षा की आंसर-की तैयार की गई थी। इस केंद्र के संचालक सरफराज और रमेश फरार चल रहे हैं। कंपनी के अधिकारियों से होगी पूछताछ ईओयू के अनुसार, आयोग द्वारा अनुबंधित मुख्य एजेंसियों को अपने मैनपावर और सब-वेंडरों का पुलिस वेरिफिकेशन कराना होता है। इसके बावजूद यूपी के इटावा में वर्ष 2023 में सिपाही भर्ती लीक कांड में लंबे समय तक जेल में रह चुके सतीश कुमार यादव को अपने हस्ताक्षर से 10 प्रमुख केंद्रों का अनुबंध दे दिया गया। ईओयू अब साई एजुकेयर के अधिकारियों और वेंडरों को तलब कर यह पूछताछ करने की तैयारी में है कि किन नियमों के तहत आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को संवेदनशील परीक्षा केंद्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई और क्या इसमें कंपनी के भीतर बैठे सिंडिकेट का कोई कमीशन खेल चल रहा था? अवैध संपत्तियों की जब्ती की तैयारी एईडीओ और अन्य भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र बाहर भेजने और फर्जी बायोमीट्रिक स्टाफ तैनात कर करोड़ों की उगाही करने वाले इस सिंडिकेट पर नकेल कसने के लिए ईओयू अब सख्त कदम उठाने जा रही है। बिहार लोक परीक्षा (अनैतिक कार्य निवारण) अधिनियम 2024 के कड़े प्रावधानों के तहत सतीश कुमार यादव, उसके सहयोगी सरफराज आलम, रमेश कुमार और मुख्य सरगनाओं द्वारा बनाई गई चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। गिरोह के बैंक खातों को फ्रीज करने के साथ-साथ परीक्षा माफिया की काली कमाई से खरीदी गई संपत्तियों को कुर्क करने के लिए ईओयू जल्द ही अदालत का रुख करेगी।
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