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कैमूर की समेकित जांच चौकी मोहनिया सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये का राजस्व देती है। इन दिनों यह चौकी अधिकारियों की लापरवाही और मनमानी का शिकार है। राजस्व की निगरानी और विभाग की आय बढ़ाने के लिए यहां तीन ईएसआई (ESI) को 8-8 घंटे की शिफ्ट में तैनात किया गया है। इसका मकसद जांच चौकी पर धांधली रोकना और वाहन चालकों को सुविधा देना था। लेकिन, हकीकत कुछ और है। रविवार को दैनिक भास्कर की टीम ने मोहनिया चेकपोस्ट का अचानक निरीक्षण किया। वहां कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था। पूरा चेकपोस्ट घंटों तक ऑपरेटरों के भरोसे था। अधिकारियों की गैरमौजूदगी के कारण टैक्स जमा कराने आए चालकों को काफी परेशानी हुई। जुर्माना घटाकर 5,000 कर दिया गया अधिकारियों के ड्यूटी पर न रहने का सीधा असर चालकों पर पड़ रहा है। उनका आर्थिक शोषण हो रहा है। पीड़ित चालक गोविंद ने बताया कि उनसे शुरुआत में ₹10,000 का जुर्माना मांगा गया था। उन्होंने इसका विरोध किया और 14 घंटे तक चेकपोस्ट पर इंतजार किया। इसके बाद बिना किसी वजह के वही जुर्माना घटाकर ₹5,000 कर दिया गया। यह घटना बताती है कि अधिकारियों की लापरवाही से चालकों को घंटों रुकना पड़ता है। साथ ही, जुर्माना तय करने में भी मनमानी और धांधली हो रही है। अधिकारियों की अनुपस्थिति और ऑपरेटरों की मनमानी से वाहन चालकों में नाराजगी है।
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