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उस दौर की राजनीति सेवा त्याग और सिद्धांतों पर आधारित बसंत पंचमी पर शिवालय आश्रम में श्रद्धांजलि सभा स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन…




सहरसा के सब्जी रोड स्थित शिवालय आश्रम में बसंत पंचमी के अवसर पर एक श्रद्धांजलि सभा और दही-चूड़ा सह भोज का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित जटाशंकर चौधरी, बिहार सरकार के पूर्व मंत्री पंडित रमेश झा और कांग्रेसी नेता स्वर्गीय वीरेंद्र नारायण सिंह की स्मृति में आयोजित हुआ। सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय लोग रहे उपस्थित श्रद्धांजलि सभा में सहरसा के पूर्व विधायक सतीश चंद्र झा, कांग्रेस जिला अध्यक्ष मुकेश झा और कांग्रेस प्रवक्ता मृत्युंजय झा सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे। सभी ने तीनों विभूतियों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उनके विचारों, संघर्ष और समाज के प्रति योगदान को याद किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक सतीश चंद्र झा ने पंडित जटाशंकर चौधरी को स्वतंत्रता सेनानी के साथ-साथ समाजवादी विचारधारा का मजबूत स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि जिस भूमि पर यह कार्यक्रम हो रहा है, वहां से हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया था। लगभग 15 वर्षों बाद इस ऐतिहासिक स्थल पर आकर उन्हें भावनात्मक संतोष मिला। झा ने बताया कि शिवालय आश्रम की स्थापना पंडित जटाशंकर चौधरी के प्रयासों से ही हुई थी और यह आज भी उन्हीं की स्मृति का प्रतीक है। आजादी के बाद उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और समाजवाद को अपने जीवन का आधार बनाया। सतीश चंद्र झा ने अपने पिता स्वर्गीय पंडित रमेश झा को याद करते हुए कहा कि उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत में पंडित जटाशंकर चौधरी की बड़ी भूमिका थी। वर्ष 1952 में धरहरा विधानसभा से चौधरी को स्वयं चुनाव लड़ने का अवसर मिला था, लेकिन उन्होंने विधायक बनने का टिकट ठुकरा कर पंडित रमेश झा को आगे बढ़ाया। इसी निर्णय से उनके पिता का राजनीतिक सफर शुरू हुआ। उन्होंने स्वर्गीय वीरेंद्र नारायण सिंह को भी सच्चे जनसेवक के रूप में याद किया। झा ने कहा कि उस दौर की राजनीति सेवा, त्याग और सिद्धांतों पर आधारित थी। आज की राजनीति में जातिवाद और धनबल के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए उन्होंने समाजवाद की मूल भावना के कमजोर होने को दुखद बताया। कार्यक्रम के अंत में दही-चूड़ा सह भोज का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की और बसंत पंचमी के अवसर पर सामाजिक एकता और स्मृति को साझा किया।



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