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मुंगेर में गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच रविवार को आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री रत्नेश सदा ने बाढ़ की स्थिति और राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा की। संग्रहालय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने अधिकारियों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, विस्थापित परिवारों, राहत शिविरों और वहां उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। बैठक में मुंगेर विधायक कुमार प्रणय, जमालपुर विधायक नचिकेता, डीएम निखिल धनराज निप्पाणीकर, एसपी सैयद इमरान मसूद, मेयर कुमकुम देवी, जिला परिषद अध्यक्ष साधना देवी, एडीएम आपदा संजय कुमार सिन्हा और डीडीसी अजीत कुमार सिंह समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। राहत कार्यों में लापरवाही नहीं बरतने का निर्देश मंत्री ने अधिकारियों को पूरी तरह अलर्ट रहने और बाढ़ प्रभावित लोगों तक समय पर राहत पहुंचाने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रभावित इलाकों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवा, स्वास्थ्य सुविधा, स्वच्छता, पशु चारा और आवागमन की व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। विस्थापित परिवारों की जरूरतों पर लगातार नजर रखी जाए और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। दो दिन में चलंत शौचालय लगाने का आदेश समीक्षा के दौरान मुंगेर और जमालपुर के विधायकों ने बाढ़ प्रभावित एवं विस्थापित लोगों के लिए चलंत और अस्थाई शौचालय की व्यवस्था कराने का सुझाव दिया। इस पर मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को दो दिनों के भीतर चलंत एवं अस्थाई शौचालय की व्यवस्था पूरी करने का निर्देश दिया। मंत्री ने कहा कि राहत शिविरों और विस्थापित आबादी वाले क्षेत्रों में स्वच्छता की पर्याप्त व्यवस्था बेहद जरूरी है। पानी उतरने के बाद फसल क्षति का होगा सर्वे बैठक में बाढ़ से किसानों को होने वाले संभावित नुकसान की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने जिला कृषि पदाधिकारी को निर्देश दिया कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में फसल क्षति का शीघ्र सर्वे कराया जाए। उन्होंने वास्तविक रूप से प्रभावित पात्र किसानों को नियमानुसार फसल क्षति का मुआवजा दिलाने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। आपदा पीड़ितों का सरकारी खजाने पर पहला अधिकार मंत्री रत्नेश सदा ने कहा कि मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि सरकारी खजाने पर पहला अधिकार आपदा पीड़ितों का है। इसलिए प्रभावित लोगों को राहत और सहायता उपलब्ध कराने में किसी तरह की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग करने और किसी भी आकस्मिक परिस्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन एवं मानवबल तैयार रखने का निर्देश दिया। मंत्री ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में चल रहे राहत-बचाव कार्यों की सराहना भी की।
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