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पूर्णिया रेंज के नए पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) आईपीएस विवेकानंद ने गुरुवार को किशनगंज जिले में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा का गहन जायजा लिया। पदभार संभालने के बाद यह उनका पहला महत्वपूर्ण सीमांत दौरा था, जिसका उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था, तस्करी रोकथाम और अंतरराज्यीय/अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सतर्कता की समीक्षा करना था। आईजी विवेकानंद ने अपने दौरे की शुरुआत गलगलिया थाना क्षेत्र से की। उन्होंने बिहार-बंगाल अंतरराज्यीय सीमा पर स्थित मद्य निषेध चेकपोस्ट का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने तैनात कर्मियों से दैनिक वाहन जांच के अभिलेखों की बारीकी से जांच की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने चेकपोस्ट पर सख्ती बरतने, अवैध शराब तस्करी पर अंकुश लगाने और रिकॉर्ड रखरखाव में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। सीमा की भौगोलिक स्थिति का अवलोकन किया
इसके बाद, आईजी विवेकानंद भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित भातगांव बीओपी (बॉर्डर आउट पोस्ट) पहुंचे। यहां उन्होंने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों से मुलाकात की और सीमा की भौगोलिक स्थिति का अवलोकन किया। सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की
उन्होंने एसएसबी 41वीं बटालियन के जवानों के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर दैनिक आवागमन, संदिग्ध गतिविधियों और सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की। आईजी ने जवानों को सीमा पर 24 घंटे सतर्क रहने, तस्करी और घुसपैठ रोकने के लिए बेहतर समन्वय तथा सूचना साझा करने के निर्देश दिए। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब पूर्णिया रेंज, जिसमें किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिले शामिल हैं, नेपाल और पश्चिम बंगाल से सटी संवेदनशील सीमाओं के कारण तस्करी, मादक पदार्थों की आवाजाही और अन्य अपराधों से जूझ रही है। अपराध पर सख्त कार्रवाई उनकी प्राथमिकता
आईजी विवेकानंद ने पदभार ग्रहण करने के बाद ही स्पष्ट किया था कि सीमा क्षेत्रों में तस्करी, ड्रग्स और संगठित अपराध पर सख्त कार्रवाई उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने ‘एंट्री माफिया’ पर भी शिकंजा कसने की बात कही है। इस निरीक्षण के दौरान किशनगंज पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार, एसडीपीओ-2 मंगलेश कुमार सिंह, गलगलिया थानाध्यक्ष राकेश कुमार सहित सीमांत क्षेत्र के कई अन्य थानाध्यक्ष मौजूद रहे। आईजी विवेकानंद का यह सक्रिय दृष्टिकोण क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषकर आगामी चुनावों और सीमा से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए, यह दौरा सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने में सहायक साबित होगा।
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