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नालन्दा में कृषि विभाग लगाएगा बायोगैस वर्मी कंपोस्ट प्लांट पांच साल तक उत्पादन के लिए होगा बॉन्ड मिलेगा सरकारी अनुदान ऑनलाइन आवेदन शुरू…




नालंदा में कृषि विभाग ने महंगी बिजली, रसोई गैस और रासायनिक खादों के बढ़ते खर्च से किसानों को निजात दिलाने के लिए जिले में 8 बायोगैस प्लांट और 1300 वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकार किसानों को कुल लागत की आधी राशि यानी 50 प्रतिशत तक अनुदान के रूप में उपलब्ध कराएगी। बायोगैस से रोशन होंगे घर, रसोई गैस की होगी भारी बचत योजना के अंतर्गत बिहारशरीफ व हिलसा अनुमंडल में तीन-तीन तथा राजगीर अनुमंडल में दो बायोगैस प्लांट लगाए जाएंगे। दो घनमीटर क्षमता वाले एक बायोगैस प्लांट की कुल निर्माण लागत 45,000 रुपए तय की गई है, जिस पर विभाग ₹22,500 रुपए का अनुदान देगा। इस योजना का लाभ उन किसानों को दिया जाएगा जो पशुपालन से जुड़े हैं और जिनके पास प्लांट निर्माण के लिए अपनी पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। बायोगैस से उत्पन्न ऊर्जा से घरों में बिजली और एलपीजी सिलेंडर के खर्च में सीधी कटौती होगी। जैविक खाद से सुधरेगी मिट्टी की सेहत रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए जिले में 1300 वर्मी कंपोस्ट इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। ईंट, बालू और सीमेंट से बनने वाले एक पक्के वर्मी पिट की लागत 10,000 हजार रुपए निर्धारित है, जिस पर 5,000 हजार की सब्सिडी मिलेगी। एक किसान को मिल सकेंगी तीन यूनिट एक किसान अधिकतम तीन पिट बनाकर 15,000 रुपए तक की प्रोत्साहन राशि प्राप्त कर सकता है। विभागीय मानकों के अनुसार वर्मी पिट का आकार 10 फीट लंबा, 3 फीट चौड़ा और 2.5 फीट ऊंचा होना चाहिए तथा बारिश से बचाव के लिए इसके ऊपर शेड लगाना अनिवार्य होगा। पांच साल उत्पादन के लिए देना होगा शपथ पत्र योजना का लाभ लेने वाले किसानों को कम से कम पांच वर्षों तक केंचुआ खाद का निरंतर उत्पादन करने का शपथ पत्र देना होगा। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक समुचित रखरखाव से एक वर्मी पिट से प्रतिवर्ष लगभग 2500 किलोग्राम शुद्ध जैविक खाद तैयार होगी। इससे खेतों में यूरिया व डीएपी की खपत घटेगी और फसलों की लागत कम होकर उत्पादन बेहतर होगा। डॉ. नितेश कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि बायोगैस और वर्मी कंपोस्ट इकाइयों के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। पात्र किसान शर्तों को पूरा कर इसका लाभ उठा सकते हैं। इससे ईंधन खर्च में कमी के साथ-साथ शुद्ध जैविक खाद से खेतों की उर्वरा शक्ति मजबूत होगी।



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