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MBBS Admission Scam | Fake Domicile NRI Quota Seats Exposed in India


“बंगाल के 11 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अपनी सेटिंग है। रैंक कितनी भी हो डेढ़ करोड़ खर्च कीजिए, आपको सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट दिला दूंगा। जिस रैंक में लोग सरकारी मेडिकल कॉलेज का सपना नहीं देख पाते, उस रैंक में आपका एडमिशन हो जाएगा। हम कॉलेज को 4-5 कर

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आपकी मां को बंगाल का निवासी बनाकर फर्जी डोमिसाइल तैयार करेंगे। बंगाल कोटे की सीट में सेट करा दूंगा। 2 डिसमिल जमीन है, पेपर्स में आपको उनका मालिक बना देंगे। देश की कोई भी एजेंसी नहीं पकड़ पाएगी…।”

यह दावा बिहार के एजेंट्स कर रहे हैं जो देश के कई राज्यों में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की MBBS सीट बेच रहे हैं। NEET विवाद के बाद भास्कर के 4 अंडर कवर रिपोर्टर्स ने 5 राज्यों के 50 से ज्यादा एजेंट्स और कॉलेज से MBBS सीट की डील की।

पढ़िए और देखिए जिस NEET पेपरलीक को लेकर इतना बड़ा आंदोलन हुआ, एजेंट्स उसके आगे बढ़कर MBBS की सीट कैसे बेच रहे हैं…।

भास्कर की इन्वेस्टिगेटिव टीम को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीट बेचने का इनपुट मिला। कई दिनों की पड़ताल के बाद पहली कड़ी के रूप में रूपेश मिला। 2 रिपोर्टर्स जनरल कोटे के कैंडिडेट्स बनकर रूपेश से अलग-अलग मिले।

पहले रिपोर्टर ने रूपेश को 325 स्कॉर बताया, दूसरे ने 540। दोनों ने कहा कि इन स्कॉर पर सरकारी कॉलेज नहीं मिल रहा है। एजेंट ने पश्चिम बंगाल के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन का दावा किया।

रूपेश का दावा- कैंडिडेट की मां को बंगाल का नागरिक बना देंगे

बंगाल के 11 सरकारी मेडिकल कॉलेजों की लिस्ट दे दूंगा। जहां जिस कॉलेज में एडमिशन लेना होगा, बता दीजिएगा। दूसरी राउंड की काउंसलिंग तक इंतजार करना होगा। कैंडिडेट देश के किसी राज्य का होगा, उसकी मां को पश्चिम बंगाल का निवासी बना दिया जाएगा।

हमने वहां पहले से 2-3 डिसमिल जमीन खरीद रखी है। मां के आधार कार्ड पर उसी जमीन का एड्रेस दे देंगे।आधार कार्ड का नंबर भी नहीं बदलेगा।

डॉक्यूमेंट्स में दिखाया जाएगा कि कैंडिडेट्स की मां बंगाल की रहने वाली है, लेकिन उसकी शादी बाहर हुई है। वो पिछले 10 सालों से बंगाल में रह रही है।

राशन कार्ड, बिजली का कनेक्शन भी बनवा देंगे। इसी आधार पर पश्चिम बंगाल के सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीट पर फॉर्म-बी के जरिए एडमिशन हो जाएगा। आप तो 18 लाख की व्यवस्था कर लो, सीट की गारंटी होगी।

रूपेश से डील के दौरान हमें पटना के एडमिशन माफिया रवि का इनपुट मिला। रिपोर्टर बोरिंग रोड में रवि के अड्‌डे पर पहुंचा तो यहां पहले से तीन से चार लोग मौजूद थे, जो सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन की बातचीत कर रहे थे।

इन्होंने भी हमसे डील करनी शुरू कर दी। इसी बीच थोड़ी ही देर में रवि भी पहुंच गया। रवि ने अपनी सेटिंग के दावे से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन का प्रोसेस बताना शुरू किया।

रवि का दावा- नेपाल और रूस का NRI बनवा देंगे

बंगाल से लेकर राजस्थान के सरकारी कॉलेजों में अपनी सेटिंग हो जाएगी। हम राजस्थान में NRI कोटे से एडमिशन करा देंगे। NRI कोटे से एडमिशन में बच्चा सेफ रहेगा, डोमिसाइल में थोड़ा रिस्क होता है। अपने पास तो हर कोटे की सेटिंग है, लेकिन NRI से कराइए, बहुत सेफ होगा।

मैं भारत, नेपाल, रूस के मेडिकल कॉलेजों में भी एडमिशन करवा दूंगा। जैसी सीट वैसा पैसा खर्च करना पड़ेगा। 430 नंबर पर NRI कोटे से राजस्थान के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन हो जाएगा। 10 लाख रुपए सेटिंग के लगेंगे और 5 लाख रुपए में पेपर तैयार होगा। NRI कोटे से एडमिशन से स्पॉन्सरशिप की जरूरत होती है, पैसे खर्च कीजिए मैं बन जाऊंगा।

पटना में 6 से ज्यादा एजेंट्स से मेडिकल कॉलेज की सीट की डील करने के दौरान बंगाल और राजस्थान के साथ देश कई राज्यों में सरकारी मेडिकल कॉलेजों का कनेक्शन सामने आया। इसकी पड़ताल के लिए भास्कर रिपोर्टर्स पेरेंट्स बनकर पटना से 600 किलोमीटर मीटर दूर पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में नॉर्थ बंगाल सरकारी मेडिकल कॉलेज पहुंचे।

यहां हमारी मुलाकात कॉलेज के काउंसलर अरुण से हुई। रिपोर्टर्स ने बताया, बिहार से भाई-बहन के एडमिशन के लिए आए हैं तो अरुण ने सेटिंग की पूरी कड़ी बता दी।

अरुण का दावा- डॉक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन हमारे हाथ में है

आपकी रैंक में देश के किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं होगा, लेकिन डोमिसाइल बनवाकर लाएंगे तो बंगाल में हो जाएगा। डोमिसाइल के लिए अलग-अलग प्रोफार्मा है। जिन छात्रों ने 2026 से पहले पश्चिम बंगाल से 10+2 की पढ़ाई पूरी की है, उनके लिए एक प्रोफार्मा है।

वहीं, इस साल 10+2 पास करने वाले छात्रों के लिए अलग प्रोफार्मा होता है। लेकिन दोनों ही मामलों में शर्त यही है कि छात्र लंबे समय से पश्चिम बंगाल का निवासी रहा हो। करीब 10 साल से राज्य में रहने की शर्त लागू होती है। जो छात्र खुद लगातार पश्चिम बंगाल में नहीं रहा हो, लेकिन उसकी मां या पिता यहां के निवासी हों और लगातार पश्चिम बंगाल में रह रहे हों।

ऐसी स्थिति में माता-पिता के निवास के आधार पर डोमिसाइल बन जाएगा। आप ब्लॉक में संपर्क कीजिए, कागज तैयार हो जाएगा। कॉलेज का काम डॉक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन का है, स्टूडेंट्स जो डॉक्यूमेंट्स लाएंगे वह विभाग से जांच करा लिए जाएंगे। कॉलेज के पास नियमों से बाहर जाकर किसी दस्तावेज को स्वीकार या खारिज करने का अधिकार नहीं है।

पटना में एजेंट्स ने सरकारी मेडिकल कॉलेज में डोमिसाइल से एडमिशन कराने का जो दावा किया था। वो बंगाल के नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज में सही साबित हो रहा था। वहां के काउंसलर ने भी हमसे वही डील की, जो पटना में हुई थी।

MBBS की सरकारी सीट के लिए पश्चिम बंगाल सेफ जोन

भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में एजेंट्स और कॉलेज की डील में सामने आया कि देश के अलग-अलग राज्यों से डोमिसाइल और NRI कोटे से एडमिशन पर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बड़ा खेल चल रहा है। बिहार से सीट बेची जा रही है, जिसपर देश के अलग-अलग राज्यों में फैले एजेंट्स की नजर रहती है।

बंगाल के 25 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 4 हजार से ज्यादा MBBS सीटें हैं। इनमें करीब 85% यानी 3,400 से ज्यादा सीटें स्टेट कोटे (डोमिसाइल) की हैं। इन्हीं सीटों पर डोमिसाइल के नाम पर बाहरी राज्यों के छात्रों को एडमिशन दिलाने का दावा एजेंट कर रहे हैं।

फर्जी डोमिसाइल- कैसे बेची जाती है 18 लाख में MBBS की सीट

  • एजेंट सबसे पहले स्टूडेंटस के NEET स्कोर, रैंक और केटेगरी की जानकारी कलेक्ट करते हैं। स्टूडेंट्स किस राज्य का निवासी है और किस राज्य में मेडिकल सीट चाहिए, ये इंटरेस्ट देखते हैं। इंटरेस्ट देखकर कम स्कोर या कमजोर रैंक वाले छात्रों के लिए भी सीट दिलाने का दावा करते हैं।
  • देश के किसी भी राज्य के स्टूडेंट्स को पश्चिम बंगाल की सरकारी मेडिकल सीट के लिए पात्र बनाने का प्लान बताते हैं। इसके लिए स्टूडेंट्स के परिवार के दस्तावेजों में बदलाव कराने का दावा किया जाता है। पश्चिम बंगाल का निवासी दिखाने के लिए पता बदलने, वोटर आईडी और बिजली कनेक्शन जैसे फर्जी डॉक्यूमेंट्स तैयार कराने का दावा किया जाता है।
  • इन दस्तावेजों के आधार पर पश्चिम बंगाल का निवास प्रमाण यानी डोमिसाइल तैयार कराने के दावे किए जाते हैं। इसके बाद उसी आधार पर छात्र को पश्चिम बंगाल का पात्र बताकर मेडिकल काउंसलिंग में आवेदन कराए जाते हैं। एजेंट के तैयार दस्तावेजों के आधार पर छात्र के लिए फॉर्म-बी के जरिए आवेदन कराते हैं।
  • फर्जी तरीके से तैयार किए गए दस्तावेजों का इस्तेमाल होता है। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कॉलेज कराता है, इसके लिए एजेंट्स पहले से ही सेटिंग कर लेते हैं। डॉक्यूमेंट्स बनाने से लेकर वेरिफिकेशन तक की पूरी प्रक्रिया एजेंट्स अपने नेटवर्क के जरिए कराता है।
  • पूरा पैसा एक साथ मांगने की बजाए डॉक्यूमेंट्स, वेरिफिकेशन और सीट अलॉटमेंट के नाम पर किश्तों में लिया जाता है।
  • स्टूडेंट्स को सीट खत्म होने का डर दिखाया जाता है, पहले बुकिंग के नाम पर पैसा, फिर डाक्यूमेंट और काउंसलिंग के नाम पर पैसे की डिमांड की जाती है।
  • डोमिसाइल के नाम पर 18 लाख रुपए की किश्त बनाई जाती है। पहले 2 लाख रुपए एडवांस लेते हैं, दस्तावेज तैयार होने के बाद 2 लाख रुपए लेते हैं, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद 2 लाख रुपए लेते हैं और बाकी रकम बच्चे के कॉलेज में एडमिशन के दौरान लेते हैं।

3 सवाल-जवाब में खबर से जुड़ा नॉलेज पार्ट जो जानना जरूरी है

सवाल- क्या इस तरह से एडमिशन होते हैं, इससे क्या नुकसान हैं? जवाब- हां, इस तरह से पैसे लेकर एडमिशन हो रहे हैं। इस तरह से एडमिशन से वो छात्र छूट जाते हैं जो पात्र होते हैं। ऐसे एडमिशन के बाद अगर आपकी शिकायत की गई तो पैसे, डिग्री और सीट तीनों जा सकते हैं।

सवाल- डोमिसाइल क्या है, इससे एडमिशन कैसे होते हैं? जवाब- डोमिसाइल को साधारण रूप से निवास प्रमाण पत्र के रूप में जारी किया जाता है। इससे साबित होता है कि आप किस राज्य के स्थाई निवासी हैं। बंगाल में 85% डोमिसाइल कोटे से एडमिशन होते हैं, इसलिए एजेंट यहां फर्जी डॉक्यूमेंट्स बनाकर एडमिशन करवाते हैं। डोमिसाइल के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड, जन्म प्रमाण-पत्र, माता या पिता का निवास, बिजली बिल के साथ घोषणा पत्र की जरूरत होती है।

सवाल- NRI कोटा क्या है, इससे एडमिशन कैसे होता है? जवाब- NRI वे भारतीय नागरिक होते हैं जो भारत के बाहर किसी दूसरे देश में रहते हैं। जो भारतीय नागरिक 180 दिनों या लंबे समय से विदेश में रह रहा हो या काम कर रहा हो या व्यवसाय कर रहा हो, वह नियमों के अनुसार NRI की श्रेणी में आता है। NRI होने के प्रमाण के लिए पासपोर्ट और वीजा के डॉक्यूमेंट्स के साथ विदेश में रहने का प्रूफ चाहिए ।

आय से जुड़े डॉक्यूमेंट्स के साथ उम्मीदवार और NRI के बीच संबंघ का प्रमाण पत्र जरूरी होता है। NRI सीट सामान्य सरकारी सीट से अलग होती है, इसकी फीस संबंधित राज्य की काउंसलिंग के अनुसार अलग-अलग होती है। एजेंट्स फर्जी NRI सर्टिफिकेट से मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन करवाते हैं।

ऑपरेशन MBBS पार्ट-2 में कल देखिए 6 राज्यों में NRI कोटे से मेडिकल कॉलेज से एडमिशन की डील…



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