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विभाग और कर्मचारी लाचार सिस्टम निहारता रहा युवराज को बचाने के लिए जान की बाजी लगाकर कूद गया डिलीवरी एजेंट जाबांज ने बताई…


Noida Yuvraj Accident Flipkart agent rescue story

फ्लिपकार्ट एजेंट मोनिंदर की बहादुरी, नोएडा में नाले से निकाली युवराज की लाश
| Image:
AI/ Grab

Noida Yuvraj Accident Flipkart agent rescue story: नोएडा की टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी में रहने वाले रिटायर्ड राजकुमार मेहता को उनके बेटे ने फोन किया था। बेटा घबराते हुए कहता रहा- मुझे बचा लो मैं डूब रहा हूं… मेरी कार नाले में गिर गई है। ये सुनते ही पिता घर से भाग पड़े और आधे घंटे में घटना स्थल पर पहुंच गए। वहां पहुंचकर बेटे को फोन करते हैं कहा हो, वो फोन की टॉर्च ऑन करके देखते हैं। बेटा कार के ऊपर लेटा था। घटना के बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए फ्लिपकार्ट के डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने बताया कि उस रात उसी ने पानी में कूदकर शव को बाहर निकाला था।

मोनिंदर की बहादुरी

डिलीवरी एजेंट मोनिंदर रात 1 बजकर 40 मिनट पर एक ऑर्डर डिलीवरी करने जा रहे थे, तभी उन्हें भीड़ दिखी। उन्होंने पहले भी 15 दिन पहले एक ड्राइवर को इसी जगह बचाया था। मोनिंदर ने सरकारी कर्मचारियों से पूछा कि क्या वे अंदर जा सकते हैं। अधिकारियों ने पूछा कि क्या उन्हें तैरना आता है। हां कहते ही मोनिंदर ने कपड़े उतारे, कमर में रस्सी बांधी और 50 मीटर अंदर चले गए। उन्होंने पूरी घटना बताई की उस रात क्या क्या हुआ।

तीन विभाग, 80 कर्मचारी फिर भी…

युवराज के पिता घटना स्थल पर पहुंचे तो युवराज कार पर लेटा था, लेटा इसलिए था ताकि कार बैलेंस न बिगड़े और बार बार हेल्प हेल्प भी चिल्ला रहा था। पुलिस, फायर ब्रिगेड और NDRF की करीब 80 लोगों की टीम मौके पर पहुंच गई लेकिन शर्मनाक बात है कि इतने लोगों के होते हुए भी सामने सामने युवराज पानी में डूब गया। उनमें से एक कोई भी न था जो तुरंत पानी में उतरकर तैर कर युवरात तक पहुंच जाए।

सभी ने संसाधनों की कमी का हवाला दिया,जोखिम का डर और कुछ न करने वाला सिस्टम इन सबके बीच बेबस पिता सामने अपने बेटे को देखते रहे और पिता के सामने ही बेटे ने तड़प तड़प कर दम तोड़ दिया। नोएडा सेक्टर 150 के टी प्वाइंट पर देर रात युवरात की कार तेज रफ्तार और कोहरे के कारण बेकाबू होकर गहरे नाले की दीवार तोड़ती हुई नाले के पानी से भरे बेसमेंट में जा गिरी। ये पानी करीब 50 फीट गहरा था। हैरानी वाली बात है कि इस तरह के खतरनाक नाले के पास कोई मजबूत बैरिकेडिंग नहीं थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड, स्थानीय लोगों ने बताया कि वो पहले से मांग कर रहे थे कि इस खतरनाक नाले के पास मजबूत बैरिकेडिंग और साइन बोर्ड लगाए जाएं लेकिन किसी ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया।

डिलीवरी एजेंट ने बताई दर्दनाक कहानी

फ्लिपकार्ट के डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने आगे बताया कि ‘वह मोड इतना खतरनाक है कि कोई भी अनजान व्यक्ति कोहरे में वहां से गुजरता है, तो 101 प्रतिशत चांस है कि वह गड्ढे में गिर जाएगा। वहां गाड़ी के टकराने के लिए कोई दीवार भी नहीं है।

यह घटना उस रात 12 बजे हुई थी। मैं वहां 1:40 बजे पहुंचा। मैं एक ऑर्डर डिलीवरी करने जा रहा था। वहां भीड़ थी और उसे देखकर मैं समझ गया कि उस रात कोहरा बहुत घना था, किसी ने अपनी कार नाले में गिरा दी थी, क्योंकि 15 दिन पहले भी कुछ ऐसा ही हुआ था। वैसी ही स्थिति थी और मैंने उस ड्राइवर को भी बचाया था। फिर किसी ने कहा कि करीब 12 बजे एक लड़का अपनी कार के साथ पानी में गिर गया है।

तुरंत कमर में रस्सी बांधकर पानी में उतरा मोनिंदर

डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने आगे बताया कि, ‘मैंने देखा कि सरकारी कर्मचारी काफी घबराए हुए थे… फिर मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं अंदर जा सकता हूं। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मुझे तैरना आता है। मैंने हां कहा। मैंने तुरंत अपने कपड़े उतारे, अपनी कमर में रस्सी बांधी और सीधे अंदर चला गया, कम से कम 50 मीटर। सड़क पर करीब 100 लोग खड़े थे, लेकिन मैं इतनी दूर अंदर चला गया कि मुझे वहां से एक भी आदमी नहीं दिख रहा था।

घंटे भर मदद के लिए चिल्लाता रहा युवराज

मोनिंदर ने बताया कि, लोग मुझे दूर से टॉर्च के सिग्नल से दिखा रहे थे कि मुझे कार कहां ढूंढनी है। लेकिन मेरे पहुंचने से ठीक 10 मिनट पहले लड़का डूब गया था। उससे पहले, लड़का 1.5 घंटे तक फंसा रहा और मदद के लिए चिल्लाता रहा। गिरने के बाद, उसने अपने पिता को भी फोन किया था.. और कहा था- ‘मैं एक गड्ढे में गिर गया हूं, कृपया मुझे बचाओ।’

तापमान फ्रीजिंग पॉइंट पर था, सभी अधिकारी भी बूढ़े

डिलीवरी एजेंट ने कहा- ‘पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची, लेकिन ज्यादातर पुलिस अधिकारी बूढ़े थे, शायद 50 साल से ज्यादा उम्र के, जवान लोग खुद अंदर नहीं गए क्योंकि उस दिन तापमान फ्रीजिंग पॉइंट से नीचे था और उन्हें तैरना नहीं आता था। उन्होंने तुरंत फायर ब्रिगेड को बुलाया, जो 20 मिनट के अंदर आ गई। मैंने उसे कम से कम 30 से 40 मिनट तक ढूंढा। लेकिन बाद में मुझे बताया गया कि, युवराज ने करीब 5 मिनट पहले मदद के लिए चिल्लाना बंद कर दिया था।’

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