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भागलपुर के कहलगांव अनुमंडल के बटेश्वर स्थान में वशिष्ठईश्वर नाथ मंदिर है। ये उत्तरायण गंगा के तट पर है। ये जगह आध्यात्मिक और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना प्रभु श्रीराम के गुरु वशिष्ठ मुनि ने की थी। यह जगह कोहल ऋषि और अष्टावक्र ऋषि जैसे महान तपस्वियों की तपस्या स्थली भी रहा है, जिससे यह भारतीय सनातन परंपरा का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। मंदिर परिसर में शिव मंदिर के सामने दक्षिणमुखी मां काली का मंदिर है। श्मशान घाट तंत्र विद्या की सिद्धि का केंद्र मंदिर के उत्तर दिशा में गंगा तट पर एक श्मशान घाट है, जो पुराना काल में तंत्र विद्या की सिद्धि का केंद्र रहा है। इसके अलावा, मंदिर से सटा आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से संरक्षित एक पुरातात्विक स्थल भी मौजूद है। विश्व प्रसिद्ध पुराना शिक्षा केंद्र विक्रमशिला विश्वविद्यालय का स्थल यहां से मात्र एक किलोमीटर दूर है। इतनी धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता के बावजूद, सरकारी उपेक्षा के कारण बटेश्वर स्थान तक पहुंचने के लिए न तो अच्छी सड़क है और न ही श्रद्धालुओं व पर्यटकों के ठहरने की समुचित व्यवस्था। रोजाना हजारों की संख्या में लोग यहां आते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। फोरलेन सड़क निर्माण की मांग की इस समस्या को लेकर स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल और पर्यटन मंत्री को लेटर लिखा है। उन्होंने बटेश्वर और विक्रमशिला तक फोरलेन सड़क निर्माण की मांग की है। लेटर में सड़क किनारे स्ट्रीट लाइट, पर्यटकों के लिए विश्राम गृह, धर्मशाला और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था करने का आग्रह किया गया है। इसके अलावा, कहलगांव के तीन पहाड़ी से बटेश्वर तक मोटर बोट सेवा शुरू करने और विक्रमशिला विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य को शीघ्र प्रारंभ कराने की भी मांग की गई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इन मांगों पर अमल होने से यह क्षेत्र न केवल धार्मिक पर्यटन का एक बड़ा केंद्र बनेगा, बल्कि इससे रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।
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