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Jansuraaj Victory in Bankipur | Prashant Kishor Impact Bihar Politics


पटना के बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव को जनसुराज के प्रशांत किशोर ने 19324 वोटों से जीत लिया है। पीके को 64117 (49.23%) वोट मिले। दूसरे नंबर पर रहे भाजपा के नीरज कुमार को 44794 (34.4%) और तीसरे नंबर पर रहीं राजद की रेखा गुप्ता को 14263 (10.95%

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भाजपा अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट हार गई। 30 साल से अभेद रहा किला ढह गया। प्रशांत पहली बार चुनाव लड़े और विधायक बने हैं। उनकी पार्टी को विधानसभा की पहली सीट मिली है।

बांकीपुर में भाजपा को इतनी बड़ी हार क्यों मिली? इस रिजल्ट का सम्राट सरकार और बिहार की राजनीति पर क्या असर होगा? 7 सवालों के जवाब में जानिए।

सवाल-1ः क्या भरत तिवारी एनकाउंटर और नीट छात्रा हत्याकांड का गुस्सा सामने आया?

जवाबः भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर ब्राह्मण और भूमिहार वोट बैंक में सम्राट सरकार के खिलाफ काफी नाराजगी थी। इन्हें बीजेपी का कोर वोट बैंक माना जाता है। उपचुनाव में ब्राह्मण और भूमिहार मतदाताओं ने अपना गुस्सा प्रकट किया। राजपूत वोट बैंक ने भी मदद की।

जहानाबाद की नीट छात्रा हत्याकांड को लेकर भी सम्राट सरकार के प्रति गुस्सा था। प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के अलग-अलग मोहल्लों की सवर्ण बहुल सोसायटियों, क्लबों और व्यापारिक मंडलों के साथ छोटी-छोटी बैठक की।

लोगों को समझाया कि भाजपा शासन में जहानाबाद की नीट छात्रा हत्याकांड और आरा के भरत तिवारी का एनकाउंटर हुआ। किसी को न्याय नहीं मिला।

बांकीपुर विधानसभा सीट जीत का सर्टिफिकेट लिए प्रशांत किशोर।

बांकीपुर विधानसभा सीट जीत का सर्टिफिकेट लिए प्रशांत किशोर।

सवाल- 2: क्या छात्र आंदोलन और पुलिस लाठीचार्ज का असर दिखा?

जवाबः बांकीपुर चुनाव ऐसे वक्त हुआ जब दिल्ली और पटना में पेपर लीक को लेकर छात्रों ने आंदोलन किया। धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा।

  • 22 से 25 जुलाई तक पटना समेत दूसरे जिलों में हुए विरोध प्रदर्शन में पुलिस ने 694 छात्रों को हिरासत में लिया, 335 को जेल भेजा। बाद में सरकार ने छात्रों पर दर्ज FIR वापस लिए और जेल से रिहा किया।
  • आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने जिस तरह लाठी चलाई उससे युवाओं में बीजेपी के प्रति नाराजगी उपजी। उन्होंने बदलाव के लिए जनसुराज को चुना।
  • बांकीपुर में मतदाताओं की कुल संख्या 3,79,616 है। 53,419 वोटर 18 से 29 साल के हैं। निर्वाचन विभाग के अनुसार 1,30,208 वोट डाले गए।
  • वोट डालने घर से निकले लोगों में युवाओं की संख्या अधिक थी। युवा वोटर भले कुल मतदाताओं के 14% हिस्सा थे, लेकिन कुल 34.30% वोटिंग में इनकी हिस्सेदारी अधिक थी।

सवाल- 3: बांकीपुर जीतने के लिए पीके ने क्या रणनीति अपनाई?

जवाबः प्रशांत किशोर ने घर-घर जाने और ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिलकर वोट मांगने की रणनीति पर काम किया। इसके लिए पदयात्रा की। 30 दिन में हर दिन 5 चाय पर चर्चा और 2 जनसभा की।

  • राजद से अधिक बीजेपी को टारगेट पर लिया। सम्राट चौधरी पर खूब हल्ला बोला। जनता से बार-बार कहते रहे कि अपने बच्चों के लिए वोट करिए, सरकार को बदलने के लिए वोट कीजिए। यह नरेटिव गढ़ने में लगे रहे कि उनकी जीत होगी तो बीजेपी बिहार में मुख्यमंत्री बदल देगी।
  • प्रशांत ने अपनी जनसभाओं में लोगों को समझाया कि भाजपा ने आपको ‘टेकन फॉर ग्रांटेड’ ले लिया है। ‘राइट पीपल, राइट थिंकिंग’ (सही लोग, सही सोच) का विचार शेयर किया। व्यवस्था में बदलाव के लिए वोट करने की अपील की।
  • पारंपरिक जातिगत नारों के बजाय ड्रेनेज/जलजमाव की समस्या, ट्रैफिक प्रबंधन और इंफ्रास्ट्रक्चर, हायर एजुकेशन और युवाओं के पलायन जैसे मुद्दे उठाए।
चुनाव जीतने के बाद अपने समर्थकों के साथ प्रशांत किशोर।

चुनाव जीतने के बाद अपने समर्थकों के साथ प्रशांत किशोर।

सवाल- 4: क्या जातिवादी मॉडल का अंत हो गया?

जवाबः बिहार की राजनीति दशकों से जाति आधारित समीकरणों (यादव, कुर्मी, राजपूत, भूमिहार, मुस्लिम, EBC, दलित आदि) पर टिकी है। प्रशांत किशोर लगातार जाति से ऊपर और ‘विकास-गवर्नेंस’ की बात करते रहे हैं।

  • बांकीपुर जैसी शहरी सीट पर उन्होंने जीत दर्ज कर जातिवादी समीकरणों के सहारे राजनीति करने वालों को मैसेज दे दिया है कि वोटर अब सिर्फ जाति नहीं, बल्कि उम्मीदवार की छवि, मुद्दे (रोजगार, पलायन, शिक्षा, प्रशासन) और नया विकल्प देखकर वोट दे रहे हैं।
  • हालांकि, सिर्फ इस जीत से जातिवादी राजनीति का अंत नहीं होगा। लेकिन राज्यभर में चर्चा जरूर तेज होगी। मीडिया, बुद्धिजीवी और युवा वर्ग में गवर्नेंस, पारदर्शिता, नौकरशाही सुधार और मेरिट पर ज्यादा बात होगी।
  • अन्य दल भी मजबूर होंगे कि वे सिर्फ जाति समीकरण न गिनाएं, बल्कि ठोस वादे और ट्रैक रिकॉर्ड दिखाएं। प्रशांत विधानसभा में अकेले विधायक के रूप में भी गवर्नेंस संबंधी मुद्दे उठाकर दबाव बनाए रख सकते हैं।

सवाल- 5: क्या सम्राट चौधरी की मुश्किलें बढ़ेंगी?

जवाबः बांकीपुर भाजपा का पारंपरिक किला रहा है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का परिवार 1995 से यहां से जीतता रहा है।

  • प्रशांत किशोर की जीत से तय हो गया कि भाजपा का शहरी, मिडिल क्लास और अपर कास्ट का मजबूत आधार हिल गया है।
  • इसका असर यह होगा कि अब राज्यभर में विकल्प नहीं होने और लालू राज के लौटने के डर से भाजपा को वोट दे रहे लोगों को विकल्प मिल जाएगा। इसका सीधा असर भाजपा के कोर वोटरों पर पड़ेगा।
  • भाजपा का अभी भी सबसे मजबूत आधार वोट बैंक जनरल कास्ट है, जो कांग्रेस से खिसक कर उसके पास पहुंचा है। अगर यह वोट बैंक बांकीपुर की तरह राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भाजपा से खिसका तो बिहार में उसकी स्थिति कांग्रेस वाली हो सकती है।
  • प्रशांत किशोर खुद कह चुके हैं- ‘यह उपचुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं है, सम्राट चौधरी के खिलाफ भी जनमत टेस्ट है। क्योंकि नीतीश कुमार के नाम पर वोट लेकर भाजपा ने अपना आदमी सेट किया है। यहां अगर भाजपा हारी तो इसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई देगी।’
  • प्रशांत किशोर की जीत का सीधा असर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पड़ेगा। प्रशांत लोगों के बीच जाकर इस बात को दोहराएंगे कि जनता सम्राट चौधरी को पसंद नहीं करती। भाजपा ने धोखा देकर नीतीश कुमार से कुर्सी हड़पी है। नैरेटिव सेट करेंगे कि सम्राट चौधरी ज्यादा दिनों तक मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे।

सवाल- 6: क्या RJD-JDU की राजनीतिक हैसियत घटेगी?

जवाबः प्रशांत किशोर की जीत नीतीश कुमार/निशांत कुमार और तेजस्वी यादव, दोनों के लिए बड़ा झटका है। दोनों की राजनीति पर इसका आगे बड़ा असर पड़ेगा। इसे ऐसे समझिए…

JDU: ‘सुशासन ब्रांड’ और EBC खिसक सकता है

  • नीतीश कुमार अब पहले वाली स्थिति में नहीं हैं। JDU पहले से ही सत्ता के लिए गठबंधन पर निर्भर है। अगर भाजपा कमजोर होगी तो इसका असर JDU पर भी पड़ेगा। पार्टी का एक धड़ा RJD से ज्यादा BJP के साथ कंफर्टेबल रहता है।
  • प्रशांत के उभार से JDU के कुछ असंतुष्ट नेता आकर्षित हो सकते हैं। पार्टी के अंदर भगदड़ मच सकती है। यह निशांत कुमार के लिए चुनौती भरा होगा।
  • नीतीश कुमार का मुख्य राजनीतिक आधार सुशासन और अति-पिछड़ा (EBC) वोट बैंक रहा है। JDU का वोट बैंक न तो चरम RJD विरोधी है और न ही पूरी तरह बीजेपी के साथ। वह विकल्प की तलाश में जनसुराज की तरफ झुक सकता है।
  • बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने JDU के वोट बैंक में सेंध लगाकर इसे साबित कर दिया है। पार्टी का EBC वोट बैंक प्रशांत किशोर की तरफ खिसक गया है।
तेजस्वी यादव ने बांकीपुर में सिर्फ दो दिन चुनाव प्रचार किया।

तेजस्वी यादव ने बांकीपुर में सिर्फ दो दिन चुनाव प्रचार किया।

RJD: तेजस्वी का M यानी मुस्लिम बिखर सकता है

  • प्रशांत किशोर की इस जीत से तेजस्वी यादव की पार्टी को भी चुनौती मिलेगी। युवा और सत्ता परिवर्तन के इच्छुक वोटर, जो कभी RJD की ओर झुकते थे, अब जनसुराज की ओर देख सकते हैं।
  • RJD को सबसे बड़ा झटका मुस्लिम वोटरों को लेकर लग सकता है। यह समाज BJP को रोकने के लिए प्रशांत किशोर की तरफ शिफ्ट हो सकता है। बांकीपुर में ऐसा दिखा भी है।
  • अगर ऐसा होगा तो तेजस्वी का MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण पूरी तरह बिखर जाएगा और पार्टी बेहद कमजोर हो जाएगी। राज्य में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी 17.7% है।
  • दुजरा, सब्जीबाग और आसपास के मुस्लिम बहुल बूथों पर RJD की अच्छी पकड़ थी, लेकिन इस बार यहां प्रशांत किशोर मजबूत होकर उभरे। तेजस्वी की पार्टी की जमानत जब्त हो गई।
  • बांकीपुर के किनारे वाले इलाके जो राजेंद्र नगर या कंकड़बाग की बस्तियों से सटे हैं, जहां यादव, केवट/मल्लाह और दलित समाज के लोग अधिक हैं, वहां RJD कड़ा मुकाबला करती थी या बढ़त बनाती थी, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ।

सवाल- 7: क्या NDA और महागठबंधन में अंदरूनी संतुलन बिगड़ेगा?

जवाबः बीते 35 सालों में बिहार में कोई पार्टी अपने दम पर सरकार नहीं बना पाई है। उसे दूसरे दलों से गठबंधन करना ही पड़ा है। फिलहाल राज्य में दो गठबंधन है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन।

  • NDA में 5 पार्टियां हैं-BJP, JDU, LJP(R), HAM, RLM।
  • महागठबंधन में 7 पार्टियां हैं-RJD, कांग्रेस, माले, CPI, CPI(M), IIP, VIP।

प्रशांत किशोर की बांकीपुर में जीत का दोनों गठबंधनों के अंदरूनी समीकरणों पर असर पड़ सकता है। महागठबंधन में तो इसकी शुरुआत भी हो गई है। कांग्रेस और RJD एक-दूसरे पर हमलावर है।

कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा- ‘बिहार में महागठबंधन को ठीक से चलाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी RJD के कंधों पर है, लेकिन बांकीपुर उपचुनाव में तेजस्वी यादव ने बाकी साथी दलों को साथ लेने की जरूरत नहीं समझी।’

‘आखिर तेजस्वी ने इस चुनाव में सहयोगियों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया? तेजस्वी यादव गठबंधन को लेकर बिल्कुल भी ईमानदार नहीं हैं। वह अपना खुद का राजनीतिक समीकरण बचाने में भी नाकाम रहे हैं।’

कांग्रेस के इस बयान पर RJD ने पलटवार किया है। RJD प्रवक्ता एजाज अहमद ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। प्रशांत की जीत से तीसरी ताकत की संभावना मजबूत होगी। NDA के अंदर के दलों का नजरिया भी अगले चुनाव तक बदल सकता है।

प्रशांत किशोर ने बांकीपुर में कुछ इस तरह चुनाव प्रचार किया था।

प्रशांत किशोर ने बांकीपुर में कुछ इस तरह चुनाव प्रचार किया था।

सवाल- 8: क्या एक सीट पर उपचुनाव से पीके को फायदा हुआ?

जवाबः विधानसभा चुनाव 2025 में प्रशांत किशोर का सामना भाजपा, राजद और जदयू जैसी पुरानी पार्टियों से हुआ, जिसके कार्यकर्ता गांव-गांव में हैं। इन पार्टियों के पास जनसुराज की तुलना में ज्यादा संसाधन हैं।

एक सीट पर उपचुनाव होने से प्रशांत किशोर को फायदा मिला। उन्होंने अपने सारे कार्यकर्ता और संसाधन लगा दिए। उन्हें पहले की तरह पूरे बिहार पर फोकस करने की जरूरत नहीं थी।

बांकीपुर के शहरी क्षेत्र होने का भी लाभ पीके को मिला। वह कम वक्त में ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिल पाए।



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