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प्रधानमंत्री के बाद अब दिल्ली पुलिस ने भी को गाली गलौज करने वाली नाबालिग को किया माफ केस लिया वापस…



दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले महीने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के विरोध प्रदर्शन में प्रधानमंत्री मोदी को गाली देने वाली नाबालिग लड़की के खिलाफ दिल्ली पुलिस अब आगे कोई कार्रवाई नहीं करने का फैसला लिया है। नोएडा पुलिस की तरफ से दर्ज जीरो FIR दिल्ली भेजी गई थी, लेकिन पुलिस ने नाबालिग को माफ करते हुए आगे मामला को नहीं बढ़ाने का फैसला किया है।

इस लड़की का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया था। वीडियो में लड़की पीएम को अपशब्द कर रही थी,गंदी-गंदी गालियां दे रही थी। इस मामले में नोएडा पुलिस ने जीरो FIR दर्ज किया था। मगर दिल्ली पुलिस ने नाबालिग लड़की के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं करने का फैसला लिया है।

नोएडा पुलिस ने दर्ज किया था जीरो FIR

नोएडा पुलिस ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपशब्द कहने की आरोपी लड़की के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज कर दिल्ली पुलिस को भेज दी थी। उस FIR में लड़की की उम्र 25 साल बताई गई थी। हालांकि बाद में उसी लड़की ने एक वीडियो जारी कर अपनी गलती के लिए माफी मांगी और बताया कि वह सिर्फ 15 साल की है। उसने कहा कि विरोध प्रदर्शन में शामिल दूसरे लोगों के बहकावे में आकर उसने अपशब्द कहा था।

वीडियो जारी कर लड़की ने मांगी थी माफी

अपने माफीनामे वाले वीडियो में लड़की ने कहा, “मैं सिर्फ 15 साल की हूं। मैंने जो कुछ भी किया, वो माफी के लायक नहीं है। मैंने बहुत-सी गलत बातें कही हैं। यह मेरी पहली और आखिरी गलती है। मैं पूरे देश से माफी मांगती हूं। मुझे बहुत शर्म आ रही है। मैं खुद से नजर भी नहीं मिला पा रही हूं। प्लीज, मुझे माफ कर दीजिए।”

PM मोदी ने गाली देने वालों छात्रों को दिया एक मौका

वहीं, शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम पर लगभग रात 11 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक वीडियो पोस्ट किया और देश के युवाओं, विशेषकर Gen-Z से सीधा संवाद साधा था। जिसमें जंतर-मंतर घटनाक्रम और उससे उपजे जन-आक्रोश पर संयम व वात्सल्य का परिचय देते हुए उन्होंने कहा था,’मैं इन बच्चों को माफ करना चाहता हूं’।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने जंतर-मंतर पर हुई अशोभनीय बयानबाजी पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा था, ‘देश और दुनिया ने जो देखा, वह किसी भी सभ्य समाज के अनुकूल नहीं है। हमारी बेटियों के मुख से ऐसी भाषा सुनना समाज के लिए एक सांस्कृतिक आघात की तरह है। मैं लोगों के आक्रोश को भली-भांति समझता हूं, लेकिन हमें यह याद रखना होगा कि बचपन में गलतियां स्वाभाविक हैं और यही सुधार का अवसर भी देती हैं।’



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