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समस्तीपुर रेलवे मंडल के अरुण मंडल सस्पेंड सीबाआई ने रिश्वत लेते पकड़ा था सरकारी बंगले से मिला था पिस्टल महीने बाद रिटायर्ड होने…




समस्तीपुर रेलवे मंडल के APO अरुण मंडल को घूस लेने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। सस्पेंड के बाद विभागीय कार्रवाई भी होगी। गुरुवार(23 जुलाई 2026) को सीबीआई की टीम ने रेलवे मंडल के कार्मिक विभाग में छापेमाकी की थी। इस दौरान अरुण मंडल को घूस लेते पकड़ा था। 3 महीने बाद रिटायर्ड होने वाले थे। करीब 10 घंटे की पूछताछ के बाद अरुण मंडल को गिरफ्तार कर लिया गया। टीम अपने साथ पटना लेकर चली गई। सीबीआई की कार्रवाई के बाद घूसखोर अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। माना जा रहा है कि मंडल के कई और अधिकारी भी सीबीआई के रडार पर हैं। डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा ने APO के निलंबन की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जेले भेजे जाने के बाद नियमानुसार उन्हें निलंबित किया गया है।
रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही नगर पुलिस APO अरुण मंडल को ट्रैप किए जाने के बाद सीबीआई की एक टीम ने रेलवे अधिकारी कॉलोनी स्थित आवास की तलाशी की थी। तलाशी के दौरान सरकारी बंगले के बेडरूम में रखे अलमारी से टीम ने एक नाइन एमएम पिस्टल बरामद किया था। रेलवे अधिकारी के घर पिस्टल देखकर सीबीआई दंग रह गई थी। सीबीआई के पीआई सुनील कुमार सिंह कुशवाहा की ओर नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। जिसमें सरकारी बंगले से एक देसी नाइन एमएम पिस्टल, दो मैगजीन और 9 गोली बरामद होने की बात कही थी। नगर पुलिस हथियार बरामदगी मामले में अरूण मंडल को रिमांड पर लेने की तैयारी शुरू कर दी है। नगर थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर अजीत कुमार ने बताया कि सीबीआई के इंस्पेक्टर के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। हथियार उनके पास कहां से आया। इस मामले को लेकर उनसे पूछताछ की जाएगी। जिसके लिए उन्हें रिमांड पर लेना जरूरी हो गया है। एक नजर में मामला 23 जुलाई को सीबीआई ने समस्तीपुर रेलवे डिवीजन के असिस्टेंट पर्सनेल ऑफिसर (एपीओ) अरुण कुमार मंडल को 50,000 रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। सीबीआई की टीम ने उन्हें लगभग 10 घंटे की पूछताछ की । छापेमारी के दौरान टीम ने कई फाइलें भी जब्त की, जो इंजीनियरिंग विभाग से जुड़ी थी। रेलवे सूत्रों के अनुसार, मंडल इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारियों की फाइलें संभालते थे और ट्रांसफर-पोस्टिंग लेटर जारी करते थे। कथित रूप से उन्होंने निजी आवेदन के जरिए मांगे गए ट्रांसफर के लिए पैसे की मांग की थी। शिकायत के अनुसार, अमृत राज ने लगभग 45 दिन पहले सीबीआई से पैसे की कथित मांग के बारे में संपर्क किया था।



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