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पूर्वी बिहार में गंगा और कोसी के बढ़ते जलस्तर का असर अब भागलपुर में भी साफ दिखाई देने लगा है। गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से तिलकामांझी विश्वविद्यालय के पीछे स्थित बस्तियों का संपर्क प्रभावित हो गया है। जिन रास्तों से लोग रोजाना चचरी पुल पर पैदल आवाजाही करते थे, अब पानी में डूब चुके हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बन गई है। कई जगहों पर लोगों को नाव तक पहुंचने के लिए भी रस्सी का सहारा लेना पड़ रहा है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से परेशानी स्थानीय महिला सोनी देवी ने बताया कि पहले ग्रामीणों के सहयोग से चचरी पुल बनवाया था, जिससे आने-जाने में सुविधा होती थी। लेकिन गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ वह पुल भी पूरी तरह डूब गया। इसके बाद अब गांव के लोगों को रोजमर्रा के काम, बच्चों की पढ़ाई, बाजार और अस्पताल जाने के लिए नाव पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे समय के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ गया है। ‘समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ’ बाढ़ से प्रभावित सकलदेव मंडल ने बताया कि कि सबसे अधिक परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को हो रही है। तेज धारा और नाव की सीमित उपलब्धता के कारण हर सफर जोखिम भरा हो गया है। वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। ‘चुनाव जीतने के बाद भी कुछ नहीं किया’ बासदेव सरकार ने जनप्रतिनिधियों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मतदान किया, लेकिन चुनाव के बाद उनकी समस्याओं की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए आज भी संघर्ष कर रही है। पार्वती देवी ने बताया कि चुनाव के दौरान नाथनगर विधायक मिथुन यादव वोट मांगने आए थे। उस समय ग्रामीणों ने उन्हें क्षेत्र की समस्याओं, विशेषकर आवागमन की कठिनाइयों से अवगत कराया था। चुनाव जीतने के बाद इन समस्याओं के समाधान के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। अगर अगली बार भी स्थिति ऐसी ही रही तो लोग अपने मतदान के बारे में नए सिरे से विचार करेंगे।
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