
Noida Engineer Death: उत्तर प्रदेश के नोएडा में शनिवार रात एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। सेक्टर-150 में पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में डूबने से 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई। लेकिन इस घटना के बाद जो हकीकत सामने आई है, वह सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती है। युवराज की मौत के चश्मदीद डिलीवरी ब्वॉय मोनिंदर ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मोनिंदर ने कहा है कि पुलिस उनपर बयान बदलने का दबाव बना रही है और वे काफी डरे हुए हैं। मोनिंदर ने बताया है कि इस मामले में उनके बयान दर्ज किए जा चुके हैं। उन्होंने ये भी दावा किया कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं।
मोनिंदर सिंह का कहना है कि उन्हें रविवार को कई बार थाने से फोन आया और दोपहर करीब एक बजे वे थाने पहुंचे, जहां से उन्हें शाम पांच बजे जाने दिया गया। इस दौरान उनका एक वीडियो भी बनवाया गया, जिसमें उन्हें यह कहते हुए दिखाया गया कि पुलिस घटना के 10-15 मिनट में पहुंच गई थी और कोहरे के कारण बचाव कार्य में देरी हुई।
अधिकारी तमाशा देखते रहे- डिलीवरी ब्वॉय का बयान
मोनिंदर का आरोप है कि जब वह मौके पर पहुंचे, तब तक प्रशासन के लोग वहां मौजूद थे। युवराज कार की छत पर लेटा हुआ था और मोबाइल की टॉर्च जलाकर मदद की गुहार लगा रहा था। मोनिंदर बताते हैं, ‘फायर ब्रिगेड की टीम के पास सीढ़ी थी, सेफ्टी जैकेट थी, लेकिन वे किनारे बैठकर इंतजार कर रहे थे। उन्होंने मुझसे पानी में उतरने को कहा, और मैं कूद गया। लेकिन वे पहले से वहां थे, उन्होंने कोशिश क्यों नहीं की?’
केस से अलग हटने का दबाव
मोनिंदर ने कहा कि ‘मुझसे कहा गया कि तुम पुलिस के खिलाफ क्यों चल रहे हो। वे (पुलिस अधिकारी) बोल रहे थे कि तुम पुलिस को साथ में लेकर चलो क्योंकि पुलिस भी तो मौके पर मौजूद थी। पुलिस मौजूद थी लेकिन लड़के को क्यों नहीं बचा पाई मैं ही क्यों पानी में कूदा। मेरे ऊपर दबाव है कि इस केस से बिल्कुल अलग हट जाओ या पुलिस को अपने साथ लेकर चलो।’
15 साल से नहीं लगी बैरिकेडिंग, अब मौत के बाद क्यों?
हादसे वाली जगह पर अब लोहे की नई बैरिकेडिंग चमक रही हैं। मोनिंदर सवाल पूछते हैं, ‘ये बैरिकेडिंग 15 साल पहले क्यों नहीं लगीं? क्या सिस्टम हमेशा किसी की मौत के बाद ही जागता है?’ बता दें कि मृतक युवराज मेहता टाटा युरेका पार्क सोसाइटी में रहते थे। शनिवार रात गुरुग्राम से ऑफिस का काम खत्म कर लौटते समय उनकी कार एक निर्माणाधीन मॉल के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में गिर गई थी। कोहरा होने के कारण वहां न तो कोई रिफ्लेक्टर था और न ही कोई चेतावनी बोर्ड।