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खगड़िया शहर के रामचंद्रा वार्ड संख्या-5 में एक महिला अपने पति के शव के पास दो दिनों तक बैठी रही, क्योंकि उसके पास अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे। बाद में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नगर प्रशासन की मदद से मृतक का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया गया। मृतक की पहचान मन्नु साह के रूप में हुई है। वे पहले दाननगर मोहल्ले में किराए पर रहते थे और मजदूरी करते थे। बाद में परिवार के साथ रामचंद्रा वार्ड-5 में झोपड़ी बनाकर रहने लगे। मन्नु साह लिवर कैंसर से पीड़ित थे और आर्थिक तंगी के कारण उनका समुचित इलाज नहीं हो सका। जिससे दो दिन पहले उनका निधन हो गया था। पैसों की कमी से 2 दिन तक नहीं हुआ अंतिम संस्कार मृतक की पत्नी अनीता देवी ने बताया कि बीमारी के दौरान भी उन्हें समाज से कोई मदद नहीं मिली। पति की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के लिए उनके पास पैसे नहीं थे, जिसके कारण उन्हें दो दिनों तक शव के पास बैठकर रोना पड़ा। अनीता देवी का एक बेटा और दो बेटियां हैं। उनकी दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। बेटा बेंगलुरु में मजदूरी करता है और उसे पति की मौत की सूचना दे दी गई है। उसके एक-दो दिनों में घर पहुंचने की संभावना है। शव से जब दुर्गंध आने लगी, तब आसपास के लोगों को घटना की जानकारी हुई। यह मामला सोशल मीडिया के माध्यम से भी सामने आया। सूचना मिलने पर वार्ड संख्या-14 के पार्षद पप्पू यादव मौके पर पहुंचे और स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा नगर प्रशासन से सहयोग की अपील की। सभी के संयुक्त प्रयास से आर्थिक सहायता जुटाई गई और मृतक का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया गया। अंतिम संस्कार के दौरान की तस्वीरें… पत्नी ने स्वयं अपने पति की चिता को दी मुखाग्नि अंतिम संस्कार के दौरान सबसे भावुक क्षण तब आया, जब पत्नी अनीता देवी ने स्वयं अपने पति की चिता को मुखाग्नि दी। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों की आंखें नम कर दीं। यह घटना केवल एक गरीब परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि समाज की संवेदनहीनता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते आसपास के लोग और समाज मदद के लिए आगे आते, तो एक असहाय पत्नी को अपने पति के शव के साथ दो दिनों तक अकेले बैठने की मजबूरी नहीं झेलनी पड़ती। हालांकि, बाद में जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और नगर प्रशासन के सहयोग से अंतिम संस्कार संपन्न हुआ, लेकिन यह घटना इंसानियत को झकझोर देने वाली मिसाल बन गई।
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