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से करोड़ तक के फ्लैट और सुविधा के नाम पर बस फर्जी दावे इलाके में मोबाइल नेटवर्क तक नहीं युवराज की मौत के…


ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में एक हादसे में होनहार इंजीनियर युवराज मेहता की जान चली गई। इस हादसे से एक परिवार का चिराग बुझा और पीछे सवालों की एक लंबी फेहरिस्त छोड़ गया। सवाल सिस्टम पर हैं, सवाल जिम्मेदार एजेंसियों पर, सवाल नोएडा विकास ऑथॉरिटी और सवाल उस इंतजार पर जिससे युवराज की जान चली गई।

इस दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर सिस्टम की पूरी पोल खोल दी है। 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता, जो गुरुग्राम से घर लौट रहे थे, घने कोहरे और खराब सड़क हालात के कारण अपनी ग्रैंड विटारा कार समेत एक गहरे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरे। यह गड्ढा एक निर्माणाधीन मॉल या बेसमेंट के लिए खोदा गया था, जो महीनों से बिना किसी सुरक्षा के खुला पड़ा था।

घटना के दौरान क्या हुआ?

16-17 जनवरी की रात को युवराज अपनी कार से गुरुग्राम से घर टाटा यूरिका पार्क सोसाइटी, सेक्टर-150 लौट रहे थे। घने कोहरे, बिना स्ट्रीट लाइट्स और रिफ्लेक्टर्स वाली सुनसान सड़क पर उनकी कार बेसमेंट के लिए खोदे गए करीब 20-30 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी।

युवराज ने ठंडे पानी में तड़पते हुए, किसी तरह कार की छत पर चढ़कर अपने पिता राजकुमार मेहता को फोन किया और कांपती आवाज में कहा, “पापा, मैं गहरे गड्ढे में गिर गया हूं, चारों तरफ पानी है… मुझे बचाओ!” उन्होंने लोकेशन भी शेयर की। पिता मौके पर पहुंचे, पुलिस को फोन लगाया, मदद के नाम पर पुलिस और फायर ब्रिगेड आई भी, लेकिन कोई पानी में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा सका। युवराज कार की छत पर खड़े होकर लगभग 90 मिनट से 2 घंटे तक मदद की गुहार लगाते रहे। मोबाइल की टॉर्च जलाकर चिल्लाते रहे, भीड़ तमाशा देखती रही और मदद नहीं पहुंची।

करोड़ों के फ्लैट्स और मोबाइल नेटवर्क तक नहीं

यह घटना महज एक हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही की जीती-जागती मिसाल है। सोसाइटी के लोग पहले से ही चिल्ला रहे थे कि इलाके में न स्ट्रीट लाइट्स हैं, न रिफ्लेक्टर्स, न बैरिकेडिंग, न चेतावनी बोर्ड। 1 करोड़ से 8 करोड़ तक के लग्जरी फ्लैट्स वाले इस इलाके में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं। सोसाइटी के लोगों का कहना है कि यहां मोबाइल नेटवर्क तक नहीं आते। नेटवर्क नहीं होने की वजह से युवराज और उसके पिता के बीच संपर्क होने में समय लगा, इसके बाद प्रशासन से संपर्क करने में भी समय लगा।

26 अप्रैल, 2025 को लिखित शिकायत

सोसाइटी में रहने वाले लोग नेटवर्क की समस्या को लेकर कई बार प्रशासन को अपनी शिकायत दे चुके हैं। 26 अप्रैल, 2025 को एक औपचारिक पत्र नोएडा अथॉरिटी के CEO को लिखा गया है। जिसमें Tata Eureka Park, Eldeco और ATS pious जैसी सोसाइटियों के पास मोबाइल नेटवर्क टावर के लिए जगह आवंटन के लिए अनुमति की मांग की गई है। लेकिन नतीजा वही ‘ढाक के तीन पात’। इलाके में गंभीर मोबाइल नेटवर्क समस्या है, जिसमें जीरो नेटवर्क, कॉल ड्रॉप, कमजोर सिग्नल और धीमा इंटरनेट शामिल है।

मोबाइल नेटवर्क ना होने से स्थानीय लोगों को व्यक्तिगत और प्रोफेशनल काम में बड़ी परेशानी होती है, खासकर इमरजेंसी में पुलिस और अस्पताल से संपर्क करने में दिक्कत आती है। सेक्टर-150 तेजी से विकसित हो रहा है। वर्तमान में करीब 15 हजार लोग यहां रहते हैं और अगले 1 साल में 30 हजार तक पहुंचने की उम्मीद है। लोग रिमोट वर्क, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, रोजमर्रा के काम के लिए मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर हैं, लेकिन कवरेज बिल्कुल अपर्याप्त है।

युवराज की मौत के प्रमुख कारण

  • गड्ढे के आसपास कोई बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर या चेतावनी बोर्ड नहीं था।
  • इलाके में नेटवर्क की समस्या से संपर्क में देरी हुआ।
  • सोसाइटी में करोड़ों के फ्लैट्स हैं, लेकिन मोबाइल नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं
  • यह 15 दिनों में दूसरा हादसा था, पहले हादसे के बाद कोई एक्शन नहीं हुआ
  • पुलिस और रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन प्रभावी बचाव में देरी हुई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का खुलासा

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि युवराज की मौत Asphyxiation (दम घुटने) से हुई, उसके फेफड़ों में पानी भर गया था। साथ ही हार्ट फेलियर भी रिपोर्ट में दर्ज है। ठंडा पानी, तनाव और सांस न ले पाने की स्थिति ने उनकी जान ली। कई लोगों का मानना है कि अगर रेस्क्यू में देरी न होती, तो शायद जान बच सकती थी।

डिलीवरी एजेंट की बहादुरी

फ्लिपकार्ट के डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने घटना देखकर अपनी जान जोखिम में डाली। उन्होंने रस्सी बांधकर 30 फीट गहरे पानी में छलांग लगा दी और युवराज को ढूंढने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मोनिंदर ने बताया कि, “मैंने बिल्डरों की सारी पोल खोल दी है। अगर मेरे साथ कुछ होता है तो प्रशासन और बिल्डर जिम्मेदार होंगे।”

मोनिंदर ने 15 दिन पहले भी इसी गड्ढे में गिरे ट्रक ड्राइवर की जान बचाई थी, इसके बाद भी बिल्डर, स्थानीय प्रशासन और नोएडा विकास ऑथॉरिटी की नींद नहीं खुला और बड़े हादसे का इंतजार करते रहे। 

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