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सम्राट का सहयोग दिन में समाधान की क्या है हकीकत पीड़ित बोले शिकायत के बाद कोई कार्रवाई नहीं नाम उजागर कर जान खतरे…




‘मैंने पटना के दीघा हाट में चल रहे एक अवैध नर्सिंग होम की शिकायत की थी। इसका कचरा सड़क पर फेंका जाता है। सिविल सर्जन ने दो जांच कराए। जांच करने वाले अधिकारियों ने हॉस्पिटल के लोगों को मेरे बारे में बता दिया। मेरी जान को खतरा है।’ पटना के दीघा में रहने वाले एडी यादव ने सहयोग पोर्टल पर शिकायत की थी। अब तक इन्हें सहयोग शिविर में नहीं बुलाया गया। इनकी शिकायत पर जांच चल रही है। दूसरी ओर एडी यादव अपनी जान को खतरा बता रहे हैं। यह इकलौता मामला नहीं है। पूरे बिहार में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें सहयोग पोर्टल पर शिकायत करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया गया। सहयोग शिविर के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने क्या कहा था? समस्या का समाधान नहीं तो निलंबन के आदेश पर कितना काम हुआ? कितने अधिकारी निलंबित हुए? पढ़िए रिपोर्ट…। पहले यह डायलॉग पढ़िए.. अफसर अगर 30 दिन में पब्लिक की समस्या का समाधान नहीं करेंगे तो 31वें दिन स्वत: सस्पेंड हो जाएंगे। पंचायतों में सहयोग शिविर तब तक चलेंगे जब तक पब्लिक के आवेदन आने बंद नहीं हो जाएं।- सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 11 मई 2026 को पटना में सहयोग पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर जारी करते हुए ये बातें कहीं। जमीनी सच्चाई यह है कि अब तक मात्र एक अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई है। वह भी मंगलवार को CM के ‘राज्यस्तरीय सहयोग कार्यक्रम’ में हुई। अब 3 उदाहरण से जानिए, शिकायत करने वालों के साथ क्या हो रहा केस 1- अवैध नर्सिंग होम की शिकायत की, अब खतरे में जान पटना के दीघा में रहने वाले एडी यादव ने सहयोग पोर्टल पर दीघा हाट के पास चल रहे कथित नर्सिंग होम को लेकर शिकायत की। बताया कि मेडिकल हॉल (दवा दुकान) के नाम पर नर्सिंग होम चलाया जा रहा है। बाहर दवा दुकान और अंदर हॉस्पिटल है। यहां सर्जरी तक होती है। अस्पताल का कचरा सड़क पर फेंका जाता है, जिससे लोगों को परेशानी होती है। संक्रमण का खतरा रहता है। सहयोग पोर्टल पर शिकायत मिलने के बाद पटना के सिविल सर्जन ने जांच के लिए टीम का गठन किया। एडी यादव से मिली जानकारी के अनुसार पहली टीम ने जांच के बाद बताया कि शिकायत सही है। इसके बाद जांच के लिए दूसरी टीम भेजी गई। इसने रिपोर्ट दिया कि अवैध नर्सिंग होम नहीं चल रहा है। इसके साथ ही एडी यादव द्वारा किए गए शिकायत की जानकारी भी नर्सिंग होम के लोगों को दे दी। अब शिकायतकर्ता अपनी जान को खतरा बता रहे हैं। इन्हें बुधवार शाम तक किसी सहयोग शिविर में बुलाया भी नहीं गया है। केस 2- शिविर के लिए आवेदन दिया, नहीं हुई कार्रवाई नालंदा जिला के इस्लामपुर प्रखंड के बेल पंचायत में रहने वाले सीताराम महतो ने कृषि बिजली पोल लगाने के लिए 19 मई 2026 को आवेदन दिया था। अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अब बारिश का मौसम आ गया है। खेत में पानी भर जाने के चलते पोल नहीं लग पाएगा। मैं 10 साल से इसके लिए कोशिश कर रहा हूं। कनीय अभियंता को कम से कम 5-6 बार लिखित आवेदन दिया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। सीताराम महतो ने कहा, ‘मैंने बिजली कनेक्शन के लिए 2200 रुपए का भुगतान भी किया था, लेकिन इसके बावजूद खेत तक बिजली की लाइन नहीं पहुंची।’ केस 3: कागजों पर कर दी कार्रवाई दरभंगा जिला के जाले प्रखंड के खनपुर रतनपुर पंचायत में रहने वाले केशव कुमार ने 11 जून 2026 को अपने क्षेत्र के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की बदहाल स्थिति की शिकायत सहयोग पोर्टल पर की थी। उनकी शिकायत पर कार्रवाई पूरी होने का दावा किया गया, लेकिन यह केवल कागजों तक ही सीमित रहा। 17 जून 2026 को जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से शिकायत के निष्पादन का पत्र जारी किया गया। दावा किया गया कि सभी आवश्यक सुधार कर दिए गए हैं। व्यवस्था पूरी तरह ठीक कर दी गई है। 56 दिनों में एक अधिकारी पर कार्रवाई सम्राट सरकार ने ‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ अभियान के तहत 19 मई 2026 से राज्यभर में सहयोग शिविर की शुरुआत की थी। मुख्यमंत्री सारण जिला के सोनपुर प्रखंड के डुमरी बुजुर्ग पंचायत में इस पहल को शुरू किया। सहयोग शिविर शुरू हुए 56 दिन हो गए। मुख्यमंत्री सचिवालय सूत्रों की मानें तो अब तक एक अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई है। मंगलवार को CM सम्राट चौधरी ने उन शिकायतों को निपटाया, जो जिलों से दूर नहीं हुईं। इसे ‘राज्यस्तरीय सहयोग कार्यक्रम’ का नाम दिया गया है। इस दौरान 129 चुनिंदा मामलों में से 100 मामले निपटे। मुख्यमंत्री द्वारा जनता की शिकायतों की सुनवाई के दौरान कई अफसर-कर्मी दोषी पाए गए। गोरौल (वैशाली) के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी राजू कुमार निलंबित हुए। उन पर दाखिल-खारिज के निष्पादन में अनावश्यक विलंब का आरोप है। पुपरी (सीतामढ़ी) के तत्कालीन सीओ तथा राजस्व कर्मचारी पर कड़ी कार्रवाई होगी। सहयोग शिविर में मिले आवेदन की मॉनिटरिंग सीधा सीएम हाउस से हो रही है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो इस समय 13 अधिकारी पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। इन्हें अंतिम नोटिस (तीसरा) जारी किया गया है। अब भी काम नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी को निलंबित किया जाएगा। सहयोग शिविर में 5 लाख शिकायतें पहुंचीं सहयोग शिविर में अब तक करीब 5 लाख लोगों ने अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं। सूत्रों की मानें तो 6 जुलाई 2026 तक 4 लाख 53 हजार आवेदन दिए गए। 15 फीसदी आवेदन में बताए गए समस्या का समाधान नहीं किया गया। प्राप्त आवेदनों में से 4 लाख 25 हजार 600 से अधिक मामलों का समाधान किया गया। करीब 27 हजार आवेदन लंबित, भेजे गए नोटिस सहयोग शिविर में मिले आवेदन में समय-सीमा के भीतर कार्रवाई पूरी नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। तय प्रक्रिया के तहत पहले संबंधित अधिकारी को जवाब देने और लंबित आवेदन का निपटारा करने का मौका दिया जा रहा है। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर दूसरा और तीसरा नोटिस जारी जा रहा है। करीब 27 हजार आवेदन लंबित हैं। इनसे जुड़े अधिकारियों को नोटिस भेजा गया है। 12,800 मामलों में पहला नोटिस: सहयोग शिविर में मिलने वाले आवेदनों के निपटारे की निगरानी सरकार ऑनलाइन कर रही है। हर आवेदन की समय-सीमा तय है। निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। 4.53 लाख आवेदनों में से 12,800 मामलों में तय समय के भीतर कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे आवेदन से जुड़े अधिकारियों को पहला नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। इसके साथ ही उन्हें लंबित आवेदन का जल्द निपटारा करने का निर्देश दिया गया है। 340 मामलों में दूसरा नोटिस: 340 मामलों में पहला नोटिस जारी करने के बाद भी समय पर कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों को दूसरा नोटिस जारी किया गया है। उन्हें देरी का कारण बताने के साथ तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिया गया है। 13 मामलों में तीसरा नोटिस: दूसरा नोटिस देने पर भी 13 मामलों में देरी जारी है। सरकार को तीसरा नोटिस जारी करना पड़ा है। इसे सहयोग शिविर की निगरानी व्यवस्था की अंतिम चेतावनी माना जाता है। तीसरे नोटिस के बाद भी आवेदन का निपटारा नहीं होता है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्हें सस्पेंड किया जाएगा। हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को लगता है सहयोग शिविर हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को सभी पंचायतों में सहयोग शिविर लगाए जाते हैं। अगर जिले में समस्या का समाधान नहीं हुआ या किसी को अपनी समस्या मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने रखनी है तो इसके लिए भी इंतजाम है। 14 जुलाई से पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में सहयोग शिविर की शुरुआत की गई। इसमें सीएम सम्राट चौधरी ने लोगों की समस्याएं सुनी। इससे पहले वह जिलों में लगने वाले सहयोग शिविर में शामिल होते थे। सहयोग शिविर में राजस्व, भूमि सुधार, बिजली, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, ग्रामीण विकास, पंचायती राज समेत कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहते हैं। आवेदन मौके पर स्वीकार किए जाते हैं। कोशिश होती है कि जहां तक संभव हो तत्काल समस्या का समाधान कराया जाए।



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