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सीतामढ़ी के तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश प्रसाद पर राज्य सूचना आयोग ने ₹25,000 का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत समय पर और सही जानकारी उपलब्ध न कराने के मामले में की गई है। यह मामला RTI कार्यकर्ता यदुवंश पंजियार द्वारा दायर एक आवेदन से जुड़ा है। पंजियार ने सीतामढ़ी जिले में प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों की सूची, उनके द्वारा ली जाने वाली फीस और जिले में संचालित रजिस्टर्ड नर्सिंग होम की जानकारी मांगी थी। जानकारी निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध नहीं कराई आरोप है कि मांगी गई जानकारी निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध नहीं कराई गई। इतना ही नहीं, लगभग तीन साल बाद जो जवाब दिया गया, वह भी अधूरा और गलत पाया गया। इसके बाद यदुवंश पंजियार ने राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि लोक सूचना पदाधिकारी (तत्कालीन सिविल सर्जन) द्वारा सूचना देने में गंभीर लापरवाही बरती गई और RTI अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया। 25,000 रुपए का आर्थिक दंड लगाया गया इसी आधार पर डॉ. अखिलेश प्रसाद पर 25,000 रुपए का आर्थिक दंड लगाया गया। राज्य सूचना आयोग के इस फैसले को सूचना के अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह अधिकारियों को समय पर और सही सूचना उपलब्ध कराने के लिए एक स्पष्ट संदेश देता है।
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