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महाभारत की अमर आवाज हुई खामोश प्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन रुपए के लिए पहली बार गाया था गाना…



छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक मंच तक पहुंचाने वाली पंडवानी की अप्रतिम गायिका और पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का शनिवार देर रात निधन हो गया। 70 वर्षीय तीजन बाई ने रात 3:15 बजे रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश की लोक कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के पीआरओ ने उनके निधन की पुष्टि की है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव में 1956 में जन्मी तीजन बाई का जीवन संघर्ष और दृढ़ संकल्प की एक अद्वितीय मिसाल रहा है। उन्होंने लोक कला ‘पंडवानी’ (महाभारत की पारंपरिक कथा गायन शैली) को न केवल सहेजा, बल्कि उसे एक नया आयाम दिया।

पंडवानी को दिलाया अंतरराष्ट्रीय पहचान

तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, जीवंत अभिनय और अनूठी प्रस्तुति शैली से महाभारत की कथाओं को मंच पर इस तरह जीवंत किया कि पंडवानी देश की सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल कर सकी। उन्होंने दशकों तक भारत की लोक परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हुए दुनिया के अनेक देशों में प्रस्तुति दी और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

मात्र 13 साल की उम्र में किया था पहला मंच प्रदर्शन

मात्र 13 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला मंच प्रदर्शन किया था। इसके लिए उन्‍हें 10 रुपए मिले थे। उस दौर में महिलाएं केवल बैठकर पंडवानी गाती थीं, जिसे वेदमती शैली कहा जाता है। तीजन बाई पहली ऐसी महिला थीं, जिन्होंने पुरुषों के वर्चस्व वाली ‘कापालिक शैली’ को चुना और खड़े होकर दमदार आवाज में प्रदर्शन करना शुरू किया।

उनकी इस अनूठी प्रतिभा को प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने पहचाना, जिसके बाद तीजन बाई का जीवन पूरी तरह बदल गया। उन्होंने देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्षों के सामने अपनी शानदार प्रस्तुतियां दीं। उन्होंने इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की और मॉरीशस सहित 17 से अधिक देशों में छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति का डंका बजाया।

साल 2019 में पद्म विभूषण से हुई थीं सम्‍मानित

लोक संस्कृति और कला के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए तीजन बाई को देश के  सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से विभूषित किया गया था जिनमें पद्म श्री (1987/88), पद्म भूषण (2003), पद्म विभूषण (2019), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार शामिल है।



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