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आईसीटी लैब की गुणवत्ता पर होगी सीधी नजर नालंदा के केंद्रों समेत राज्यभर में जांच को लेकर टीमें गठित लेवल में निगरानी…




बिहार के सरकारी स्कूलों में निजी संस्थानों की तर्ज पर आधुनिक और डिजिटल शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से स्थापित आईसीटी लैब अब जांच के दायरे में होंगे। राज्य परियोजना निदेशालय ने सूबे के 1,459 स्कूलों में स्थापित इन लैबों की गुणवत्ता और वास्तविक संचालन की परख करने का निर्णय लिया है। इस जांच अभियान में नालंदा जिले के 43 स्कूल भी शामिल हैं। 22 बिंदुओं पर परखी जाएगी लैब की गुणवत्ता बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक (एसपीडी) प्रशांत कुमार सीएच ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को पत्र जारी कर इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लेने का निर्देश दिया है। जांच के लिए कुल 22 बिंदुओं का मानक तैयार किया गया है। इन लैबों में डेस्कटॉप, प्रिंटर, यूपीएस, फर्नीचर, नेटवर्किंग उपकरण, विद्युतीकरण, हाई-स्पीड इंटरनेट (4जी), डिजिटल टीवी, रिमोट मैनेजमेंट सिस्टम और बीएसएनएल ब्रॉडबैंड की कार्य क्षमता की बारीकी से जांच की जाएगी। साथ ही, लैब की भौतिक स्थिति का भी जायजा लिया जाएगा। दो-स्तरीय निगरानी प्रणाली का गठन लैबों के संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दो-स्तरीय निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। ये समितियां अपने-अपने प्रखंडों के सभी लैबों की जांच करेंगी। प्रखंड स्तर पर प्राप्त रिपोर्ट की सत्यता और गुणवत्ता जांचने के लिए जिला स्तरीय टीम कम से कम 10 फीसदी लैबों का औचक निरीक्षण करेगी। लाखों का हुआ है निवेश सरकारी स्कूलों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए भारी-भरकम राशि खर्च की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, टाइप-एक हाईस्कूलों के लिए 6.38 लाख से लेकर 4.38 लाख रुपए तक प्रति विद्यालय आवंटित किए गए थे। वहीं, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों के लिए भी विभिन्न टाइप के अनुसार 2.90 लाख से लेकर 4.35 लाख रुपए तक का बजट जारी किया गया था। यह कार्य केंद्रीय भंडार, रेलटेल और टीसीआईएल जैसी एजेंसियों के माध्यम से 31 मार्च 2026 तक पूरा कर लिया गया है। सुविधाओं को अपग्रेड किया जा रहा है राज्य परियोजना निदेशक प्रशांत कुमार सीएच ने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए सुविधाओं को लगातार अपग्रेड किया जा रहा है। इन लैबों का उद्देश्य विद्यार्थियों को तकनीक के साथ जोड़ना है। मॉनिटरिंग सिस्टम को चुस्त बनाया जा रहा है ताकि विद्यार्थियों को इन सुविधाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिल सके।



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