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पूर्णिया में अंधविश्वास एक बार फिर मासूम की जान पर भारी पड़ा। सांप के डसने के बाद डेढ़ साल के बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन गांव में झाड़-फूंक कराते रहे। इसी देरी ने उसकी जिंदगी छीन ली। जब बच्चे की हालत बेहद गंभीर हो गई और उसके मुंह से झाग निकलने लगा, तब परिजन उसे जीएमसीएच पूर्णिया लेकर पहुंचे। हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी। इलाज के दौरान डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। मृतक की पहचान चंदेश्वरी ऋषि के डेढ़ साल के बेटे ईश्वा कुमार के रूप में हुई है। परिवार झुन्नी बलवा इस्तांबरा का रहने वाला है। पांच बहन में इकलौता बेटा था। पिता मजदूरी करते हैं। इलाज के दौरान तोड़ा दम पिता चंदेश्वरी ऋषि ने बताया कि ईश्वा घर के पास खेल रहा था, तभी उसे सांप ने डस लिया। झाड़-फूंक कराने के दौरान उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। कुछ देर बाद बच्चे के मुंह से झाग निकलने लगा और वह अचेत होने लगा। इसके बाद आनन-फानन में जीएमसीएच लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। समय पर अस्पताल लाया जाता तो जान बच जाती डॉक्टरों ने बताया कि सांप के काटने पर झाड़-फूंक या तंत्र-मंत्र के भरोसे समय गंवाना जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे मामलों में पीड़ित को बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचाना ही उसकी जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है। झाड़ फूंक के बजाए मासूम को सही समय पर अस्पताल लाया जाता तो उसकी जान बच सकती थी।
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