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‘मैडम गांधी मैदान में मीटिंग में थीं। तभी कदमकुंआ थाने से फोन आया कि आपके इलाके में ऐसी घटना हुई है। मैडम वहां से अस्पताल गईं। उन्हें हॉस्टल का पता ही नहीं था। मैंने अपने 4-5 दोस्तों से पूछकर मुन्ना चक गली का पता किया और सबसे पहले मैं ही हॉस्टल पहुंचा। गेट नहीं खुल रहा था, काफी प्रयास के बाद उन लोगों ने गेट खोला। वहीं से कैमरे का DVR उठाकर मैं थाने ले आया। न कोई फोरेंसिक टीम गई और न एक्सपर्ट।’ ये कहना है थाना प्रभारी रोशनी कुमारी के प्राइवेट ड्राइवर प्रेम का। शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET छात्रा के रेप-मौत मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। तीन दिन तक थाना प्रभारी घटनास्थल पर पहुंचीं ही नहीं। सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका के बीच पुलिस अब 4 थ्योरी पर जांच कर रही है। इसमें मुख्य आरोपी, घटनास्थल और लापरवाहियों के एंगल पर जांच हो रही है। इस बीच दैनिक भास्कर ने एक ऐसे व्यक्ति से बात की जो हॉस्टल में पहुंचने वाला सबसे पहला व्यक्ति था। पढ़िए उसने क्या बताया…? भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि लड़की से वारदात की जानकारी चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रोशनी कुमारी को कदमकुंआ थाने से मिली थी। उस वक्त वह गांधी मैदान में मीटिंग में थीं। सूचना मिलने के बाद वह अस्पताल तो पहुंचीं, लेकिन घटनास्थल यानी हॉस्टल कहां है, इसकी उन्हें जानकारी तक नहीं ली। रोशनी कुमारी के ड्राइवर ने हिडन कैमरे पर बताया, ‘मैं उस दिन मैडम के साथ गांधी मैदान में मीटिंग में गया था। इसी दौरान सूचना मिली कि लड़की के साथ कुछ वारदात हो गई है। मैडम मीटिंग खत्म करके अस्पताल पहुंची। यहां उन्होंने डॉक्टर्स से बातचीत की, लेकिन वो हॉस्टल नहीं गईं।’ ड्राइवर ने बताया, ‘ मैडम को हॉस्टल का एड्रेस पता नहीं था, इसलिए उन्होंने मुझसे कहा, पता करो ये हॉस्टल कहां है? मैं अपने कुछ साथियों के साथ हॉस्टल पहुंचा। तब तक घटना के तीन दिन हो चुके थे। यानी नौ जनवरी को मैं हॉस्टल पहुंचा था। काफी देर तक दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया। लेकिन हॉस्टल वालों ने दरवाजा नहीं खोला। फिर हमने पुलिस का हवाला दिया तब जाकर दरवाजा खोला गया। मैंने वहां अंदर जाकर सबसे पहले डीवीआर निकाली और उसे लेकर थाने आ गया। मैंने ही मैडम को पूरी डीवीआर दिखाई।’ अब बड़ा सवाल यही उठता है जब किसी लड़की से यौन शोषण के मामले की शिकायत मिलती है तो थाना प्रभारी को या तो खुद जाना चाहिए था या कि प्रशिक्षित अधिकारी को भेजतीं, ताकि वह वहां के हालात और सबूत देख सके। सूत्रों का कहना है कि 9 जनवरी को डीवीआर जब्त किया गया, जबकि घटना 5–6 जनवरी की है। यानी करीब तीन दिन का गैप, जिसमें सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अब पढ़िए किन 4 थ्योरी के इर्दगिर्द घूम रही पुलिस की जांच थ्योरी 1: पटना पहुंचने से पहले छात्रा की स्थिति क्या थी? पुलिस की पहली थ्योरी इस सवाल के इर्द-गिर्द घूम रही है कि 5 जनवरी को जहानाबाद से पटना के बीच छात्रा की शारीरिक और मानसिक स्थिति क्या थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, छात्रा ने दोपहर 1 बजे जहानाबाद से ट्रेन पकड़ी और करीब 3 बजे पटना जंक्शन पर देखी गई। 3:35 बजे वह शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची और पिता को फोन कर बताया कि वह ठीक है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या यात्रा के दौरान या उससे पहले किसी तरह की असामान्य घटना हुई थी। मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), टावर लोकेशन और स्टेशन के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि अब तक इस थ्योरी में कोई ठोस संकेत नहीं मिले हैं, जो यह साबित करें कि छात्रा पहले से किसी गंभीर तनाव में थी। इसके उलट, परिजनों और परिचितों के बयान बताते हैं कि वह सामान्य अवस्था में पटना पहुंची थी। थ्योरी 2: हॉस्टल पहुंचने के बाद किन लोगों से संपर्क हुआ? पुलिस की दूसरी थ्योरी पटना पहुंचने के बाद छात्रा की मूवमेंट पर केंद्रित है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हॉस्टल पहुंचने के बाद वह बाहर गई या किसी से मिली थी या नहीं। सूत्रों के मुताबिक, छात्रा 3:35 बजे हॉस्टल पहुंची थी और शाम को ही उसे बेहोशी की हालत में मेडिकल दुकान ले जाया गया। यानी चार से पांच घंटे का एक ऐसा गैप, जिसमें सबसे बड़ी घटना घटित हुई। पुलिस यह भी जांच रही है कि मेडिकल दुकान तक छात्रा को कौन लेकर गया और क्यों उसे सीधे अस्पताल नहीं ले जाया गया। थ्योरी 3: क्या अपराध हॉस्टल परिसर के भीतर हुआ? तीसरी और सबसे अहम थ्योरी यह है कि अगर छात्रा हॉस्टल पहुंचते वक्त पूरी तरह सामान्य थी, तो अपराध हॉस्टल परिसर के भीतर ही हुआ है। उसमें भी यह जांचा जा रहा है कि घटना उसके कमरे में हुई या हॉस्टल के किसी अन्य रूम में। सूत्रों के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और डॉक्टरों की शुरुआती MLC में चोट और खरोंच के निशान दर्ज किए गए थे। प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल में 6 जनवरी को इलाज के दौरान डॉक्टरों ने यह जानकारी अस्पताल प्रबंधन, पुलिस और परिजनों को दी थी। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि हॉस्टल के किस हिस्से में, किस कमरे और किन लोगों की मौजूदगी में यह सब हुआ। तीन दरवाजों वाले हॉस्टल में पीछे के गेट और लिंक रोड कनेक्शन को खास तौर पर जांच के दायरे में लिया गया है। थ्योरी 4:किसी करीबी से कई बार बातचीत हुई सूत्रों के मुताबिक, इस केस में एक चौथी और बहुत ही संवेदनशील थ्योरी भी सामने आ रही है। छात्रा अपने मोबाइल से एक खास नंबर पर बार-बार बात कर रही थी। यह नंबर किसी अनजान व्यक्ति का नहीं, बल्कि उसके करीबी सर्कल से जुड़े शख्स का बताया जा रहा है। यह कॉल पैटर्न 5 जनवरी को छात्रा के पटना पहुंचने से पहले और बाद दोनों समय में एक्टिव दिखा है। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या यह सिर्फ सामान्य बातचीत थी या किसी तरह का मानसिक दबाव, या फिर किसी से मुलाकात इसमें जुड़ी हुई है। पुलिस यह भी देख रही है कि जहानाबाद में भी छात्रा कब और किससे मिली थी।
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