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Bihar Labour Death | Andhra Factory Bondage



बिहार के ग्रामीण इलाकों से सीधे-सादे युवकों को बहला-फुसलाकर दूसरे राज्यों में ले जाने और वहां बंधुआ बनाकर जानलेवा परिस्थितियों में काम कराने वाले एक बड़े रैकेट का सनसनीखेज खुलासा हुआ है।

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पूर्णिया में कसबा थाना क्षेत्र के जियनगंज (वार्ड नंबर 05) के रहने वाले राजिक 35 वर्ष की मौत इलाज़ के दौरान पटना एम्स में गुरुवार को हो गई वहीं पूर्व में 22 वर्षीय युवक मसद आलम की भी मौत हुई थी।

इन सभी मजदूरों को आंध्र प्रदेश की एक मिनरल्स फैक्ट्री में प्रताड़ना और फेफड़े खराब होने के कारण मौत हो गई है। घटना के बाद पूरे गांव में कोहराम मचा हुआ है,

वहीं मृतक मसद के पिता मुस्ताक आलम (60 वर्ष) के बयान पर पुलिस ने बीते दिन 3 जून 2026 को स्थानीय ठेकेदारों और फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

बहला-फुसलाकर ले गए थे आंध्र प्रदेश

मृतक के पिता द्वारा पुलिस को दिए गए आवेदन के अनुसार, करीब एक साल पहले गांव के ही तीन दबंग ठेकेदारों मो. जुनेद (30 वर्ष), मो. गुडलक (25 वर्ष) और मो. सैफ (19 वर्ष) (तीनों के पिता मो. मुन्ना उर्फ समीर अख्तर) ने उनके बेटे मसद आलम को लेबर ठेकेदारी के काम का झांसा दिया था।

परिजनों के मना करने के बावजूद ये लोग मसद को बिना बताए अपने साथ ले गए। इसके साथ ही गांव के कई अन्य लड़कों को भी काम दिलाने के नाम पर ले जाया गया था।

बीमार हालत में घर लाया गया था

बीमार स्थिति में परिजनों ने मसद को वापस घर लाया था, वह अत्यंत गंभीर स्थिति में था। पिता उसे इलाज के लिए पहले कटिहार और फिर पटना ले गए।

डॉक्टर के जवाब देने पर घर लाते समय तोड़ा था दम

डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि “फेफड़ों में धूलकण (सिलिका/पत्थर का पाउडर) भर जाने के कारण मसद के फेफड़े पूरी तरह खराब हो चुके हैं, जो अब ठीक नहीं हो सकते।” 1 जून 2026 की शाम को पटना से वापस घर लाते समय रास्ते में ही मसद आलम ने दम तोड़ दिया।

पुलिस ने लेबर एक्ट के तहत दर्ज किया था मामला

मसाद की मौत के बाद कसबा थाना पुलिस ने बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम (Bonded Labour Act) की सुसंगत धाराओं के तहत केस (Case No: 236/26) दर्ज कर लिया था। पुलिस अनुसंधान कर ही रहे थे किसी बीच और गांव के चार लोगों के मौत हो गई।

लगातार हो रही मौत से पूर्व मंत्री बिहार सरकार के मोहम्मद अफाक आलम ने मीडिया से कहां की अब तक मृतक के परिवारों को सरकार से किसी तरह की कोई सहायता नहीं मिली है।

बिहार से मजदूरों के पलायन हो रहे लगातार उन पर भी उन्होंने कहा कि यहां एक तरह की पलायन नहीं है।

बिहार के कई लोग जो डॉक्टर इंजीनियर मजदूर एवं मिडिल क्लास के ऐसे कई लोग हैं जिन्हें यहां रोजगार नहीं मिला और वह बाहर जाकर प्रदेशों में काम करते हैं।

यहां के मजदूर गरीबी होने के कारण बाहर मजदूरी करने जाते हैं। बिहार में किसी तरह का उद्योग नहीं है जो यहां मजदूर काम कर सके इसके लिए सरकार को गंभीरता से सोचनी चाहिए।

पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन दिया

वही घटनास्थल पर पहुंचे कस्बा थाना के सब इंस्पेक्टर प्रिंस कुमार ने बताया कि उक्त मामले में 3 जून को ही कस्बा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है, हमारे रिपोर्ट पर आंध्र प्रदेश की सरकार ने कार्यवाही करते हुए फैक्ट्री को बंद कर दिया है वहीं फैक्ट्री संचालक के विरुद्ध साक्ष्य जुटाने में पुलिस लगी हैं अनुसंधान जारी है निश्चित रूप से कानूनी कार्यवाही होगी।



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