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गयाजी के प्रभावती अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर अनियमितताओं, नियमों के उल्लंघन और धोखाधड़ीपूर्ण आचरण के आरोप में लखनऊ की लायन सिक्योरिटी गार्ड सर्विसेज का अनुबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। अस्पताल की अधीक्षक डॉ. सुषमा वर्मा ने कड़ा रुख अपनाते हुए एजेंसी को लिखित आदेश जारी कर परिसर को तुरंत खाली करने का निर्देश दिया है। इस बड़ी कार्रवाई से स्वास्थ्य महकमे और निजी सुरक्षा एजेंसियों के सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है। इस सुरक्षा एजेंसी को 18 नवंबर 2025 को जिम्मा सौंपा गया था। इसके बाद 1 दिसंबर 2025 से एजेंसी ने अस्पताल परिसर में कुल 56 कर्मियों की तैनाती की थी। जिनमें 50 सुरक्षा गार्ड, 5 सुपरवाइजर और 1 इलेक्ट्रिशियन शामिल थे। एजेंसी को दिसंबर 2025 तक 15.41 लाख रुपए के पहले बिल का भुगतान भी कर दिया गया था। इसके बाद की अवधि के लिए आवश्यक और वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत न करने के कारण अस्पताल प्रशासन ने आगामी भुगतानों पर रोक लगा दी, जिसके चलते सुरक्षाकर्मियों का वेतन पिछले जनवरी महीने से रुका हुआ है। 23 कर्मियों का वैध पुलिस वेरिफिकेशन नहीं मामले की आंतरिक जांच में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ, वह मरीजों और महिला डॉक्टरों की सुरक्षा से जुड़ा है। जांच में पाया गया कि तैनात 56 कर्मियों में से केवल 33 के पास ही पुलिस चरित्र प्रमाणपत्र उपलब्ध थे। शेष 23 कर्मियों का कोई वैध पुलिस वेरिफिकेशन नहीं था। सबसे गंभीर बात यह है कि तैनाती के वक्त सिर्फ दो कर्मियों के पास वैध चरित्र प्रमाणपत्र थे। शेष अधिकांश प्रमाणपत्र तब आननफानन में बनवाए गए जब अस्पताल प्रशासन द्वारा एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। श्रम लाइसेंस और बैंक गारंटी भी गायब, शर्तों की उड़ाई धज्जियां एजेंसी अनुबंध के तहत आवश्यक पांच प्रतिशत परफॉर्मेंस सिक्योरिटी और बैंक गारंटी भी जमा नहीं करा सकी। इसके अलावा, श्रम विभाग का वैध लाइसेंस, कर्मचारियों की उपस्थिति पंजी, नियुक्ति पत्र, प्रशिक्षण प्रमाणपत्र, पहचान पत्र और ईपीएफ से संबंधित कोई भी वैधानिक दस्तावेज अस्पताल प्रशासन को उपलब्ध नहीं कराए गए। हद तो तब हो गई जब एजेंसी ने 18 मई को पत्र भेजकर अस्पताल में किसी भी अप्रिय घटना के लिए जिम्मेदारी लेने से ही साफ इनकार कर दिया। अधीक्षक से बदसलूकी और धमकी, छावनी में बदला अस्पताल मामले में नया मोड़ 4 जून को आया जब एजेंसी के संचालक ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुषमा वर्मा के कार्यालय में घुसकर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और मौखिक रूप से गंभीर धमकियां दीं। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि मामले को नियंत्रित करने और खुद की सुरक्षा के लिए अधीक्षक को तत्काल पुलिस बल बुलाना पड़ा। डॉ. सुषमा वर्मा ने बताया कि एजेंसी के इस रवैए के कारण मेरे लिए अस्पताल परिसर में मानसिक रूप से भय और असुरक्षा की स्थिति उत्पन्न हो गई है। बीएमएसआईसीएल को भेजा गया नई व्यवस्था का प्रस्ताव अस्पताल अधीक्षक ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट डीएम, एसएसपी श्रम अधीक्षक और बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड को लिखित रूप में भेज दी है। नए पीएसएआरए मानकों के अनुरूप एक विश्वसनीय सुरक्षा एजेंसी की तत्काल बहाली के लिए बीएमएसआईसीएल को प्रस्ताव भेजा गया है। दो बार सिविल लाइन थाने को भी सूचित किया गया है। क्योंकि टेंडर रद्द होने के बाद भी दबंगई दिखाते हुए एजेंसी के लोग अब भी अस्पताल परिसर में अवैध रूप से जमे हुए हैं।
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