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दरभंगा के बिरौल सिविल कोर्ट में शुक्रवार को एक गवाह शराब के नशे में गवाही देने पहुंच गया। गवाह को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में एक मामले की सुनवाई के दौरान गवाही देनी थी। गवाही के दौरान गवाह की जुबान लड़खड़ाने लगी। इसके बाद सीनियर वकील के निर्देश पर कराई गई जांच में शराब सेवन की पुष्टि होने के बाद उसके खिलाफ बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। फिलहाल, शराब पीने के आरोपी को जेल भेज दिया गया है। जानकारी के अनुसार, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में एक मामले की सुनवाई चल रही थी। इस दौरान मामले के सूचक बैजनाथ राय की गवाही ली जा रही थी। गवाही के दौरान सीनियर वकील रामचन्द्र यादव को गवाह की स्थिति संदिग्ध प्रतीत हुई। उन्हें आशंका हुई कि गवाह शराब के नशे में अदालत में उपस्थित होकर बयान दे रहा है। वकील ने तत्काल कोर्ट में आवेदन देकर जांच की मांग की गवाह की गतिविधियों पर संदेह होने के बाद सीनियर वकील रामचन्द्र यादव ने तत्काल कोर्ट में आवेदन देकर जांच कराने की मांग की। उन्होंने अदालत को बताया कि गवाह की स्थिति सामान्य नहीं लग रही है और वह संभवतः शराब के प्रभाव में गवाही दे रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने तत्काल संज्ञान लिया और बिरौल थाना पुलिस को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। ब्रेथ एनालाइजर से जांच में शराब पीने की हुई पुष्टि कोर्ट के आदेश के बाद बिरौल थानाध्यक्ष चंद्रमणि पुलिस बल के साथ न्यायालय पहुंचे और गवाह बैजनाथ राय की ब्रेथ एनालाइजर मशीन से जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में शराब सेवन की पुष्टि हुई। पुलिस के अनुसार, जांच में 100 एमएल रक्त में 16 एमएम अल्कोहल की मात्रा पाई गई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि गवाह शराब के प्रभाव में था। हांसी गांव का रहने वाला है आरोपी थानाध्यक्ष चंद्रमणि ने बताया कि बैजनाथ राय बिरौल थाना क्षेत्र के हांसी गांव का निवासी है। जांच रिपोर्ट तैयार कर न्यायालय को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत आरोपी गवाह के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। पुलिस अब न्यायालय को पूरी स्थिति से अवगत कराकर आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने की कार्रवाई करेगी। शराबबंदी कानून के उल्लंघन का मामला बिहार में लागू शराबबंदी कानून के तहत शराब पीना, शराब के नशे में सार्वजनिक स्थान पर पाया जाना अथवा कानून का किसी भी रूप में उल्लंघन करना दंडनीय अपराध है। ऐसे में न्यायालय परिसर जैसे संवेदनशील और गरिमामय स्थान पर नशे की हालत में पहुंचना और गवाही देना कानून के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता पर भी सवाल खड़ा करता है। न्यायालय परिसर में हुई इस अनोखी घटना की चर्चा दिनभर अधिवक्ताओं, न्यायालय कर्मियों और आम लोगों के बीच होती रही। लोगों के बीच यह चर्चा का विषय बना रहा कि जिस व्यक्ति की गवाही के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़नी थी, वही शराब के नशे में अदालत पहुंच गया। फिलहाल पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है तथा न्यायालय को पूरी रिपोर्ट सौंपे जाने की प्रक्रिया जारी है।
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